
नई दिल्ली, 04 जून (हि.स.)। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए चिपयाना बुजुर्ग-टूंडला रेल खंड पर ‘कवच’ वर्जन 4.0 के सफल कमीशनिंग की जानकारी दी।
उत्तर मध्य रेलवे के संकेत एवं दूरसंचार विभाग ने पहली बार 175 रूट किलोमीटर लंबे चिपयाना बुजुर्ग-टूंडला खंड पर 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की परिचालन गति के लिए अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ वर्जन 4.0 (टीसीएएस) को सफलतापूर्वक चालू किया है। इसके साथ ही उत्तर मध्य रेलवे में कवच वर्जन 4.0 का कुल नेटवर्क बढ़कर 445 रूट किलोमीटर तक पहुंच गया है।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व और प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेन्द्र कुमार के तकनीकी मार्गदर्शन में हासिल की गई। इस प्रणाली का परीक्षण कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस (12033/12034) में किया गया, जो केर्नेक्स निर्मित कवच प्रणाली से लैस है।
रेलवे के अनुसार यह पूरे भारतीय रेल नेटवर्क का पहला ऐसा खंड बन गया है जहां 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति पर कवच वर्जन 4.0 पूरी तरह क्रियाशील है। इसके अलावा पहली बार कवच प्रणाली को प्रोटोकॉल कन्वर्टर्स के माध्यम से हिताची इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे ट्रैक और सिग्नलिंग ढांचे का निर्बाध एकीकरण संभव हुआ है।
परियोजना के तहत 22 स्टेशन टीसीएएस और नौ लेवल क्रॉसिंग टीसीएएस इकाइयां स्थापित की गईं। साथ ही 10 डब्ल्यूएपी-7 इंजनों को कवच प्रणाली से लैस किया गया। रेलवे ने 4,500 से अधिक आरएफआईडी टैग लगाए, नौ नए 40 मीटर ऊंचे संचार टावर स्थापित किए और 48-कोर फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क बिछाया।
कवच प्रणाली को चालू करने से पहले इसे व्यापक सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया। अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), उत्तर मध्य रेलवे की टीम और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता ‘इटालसर्टिफायर’ द्वारा 10,000 किलोमीटर से अधिक की परीक्षण दौड़ कराई गई। इसके अलावा 180 से अधिक सिग्नल पास्ड एट डेंजर (एसपीएडी) रोकथाम और गति नियंत्रण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हेड-ऑन और रियर-एंड टक्कर रोधी परीक्षण भी पूरी तरह सफल रहे। वंदे भारत, शताब्दी और श्रमशक्ति एक्सप्रेस सहित विभिन्न ट्रेनों तथा डब्ल्यूएपी-5 और डब्ल्यूएपी-7 इंजनों के साथ इस प्रणाली का व्यापक परीक्षण किया गया।
रेल मंत्री ने इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे की सुरक्षा और आधुनिकीकरण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। वहीं उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने इसे मिशन रफ्तार की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताते हुए पूरी तकनीकी टीम को बधाई दी।
दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर लागू की गई यह तकनीक रेल परिचालन की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में उच्च गति रेल संचालन के लिए भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार