प्रधानमंत्री मोदी ने दी विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं, कहा-प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत

युगवार्ता    05-Jun-2026
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक्स हैंडल पर आज सुबह विश्व पर्यावरण दिवस पर एक वीडियो भी अपलोड किया गया। इसमें वो कहते हैं कि 'एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य' के सिद्धांत से प्रेरित होकर, हम 'मिशन लाइफ (एलआईएफई)' की भावना के साथ एक स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ ग्रह की दिशा में काम करना जारी रखेंगे।


नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह दिन पर्यावरण की रक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की आज जारी विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से देश में हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है और कई वन्यजीव प्रजातियों की आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने सामूहिक प्रयासों, प्रभावी नीतियों, विज्ञान में विश्वास और नवाचार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर दिखाया है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी समृद्ध जैविक विविधता पर गर्व है। देश के विविध पारिस्थितिकी तंत्र अनगिनत प्रजातियों और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं। प्रधानमंत्री ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए, स्लॉथ भालू और चीतों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि निरंतर प्रतिबद्धता से वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्रों का सफल पुनरुद्धार संभव है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल ने हर वर्ष लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर भारत मिशन लाइफ की भावना के अनुरूप स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए सुभाषितम् मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिंधवः। माधवीर्नः सन्त्वोषधीः॥ साझा किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल दायित्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों का मूल सिद्धांत है। इस सुभाषितम् का अर्थ है-

हमारे चारों ओर बहने वाली वायु सुखद और कल्याणकारी हो। नदियां जीवनदायी जल प्रदान करें । औषधियां और वनस्पतियां सभी जीवों के स्वास्थ्य एवं कल्याण का आधार बनें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह संदेश प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की भारतीय परंपरा को दर्शाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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