
अहमदाबाद, 08 जून (हि.स.)। पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में मेजबान भारत ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में एकतरफा वर्चस्व कायम किया। पांच दिनों तक चली इस प्रतियोगिता के समापन पर भारतीय खिलाड़ियों ने 102 स्वर्ण सहित कुल 114 पदक जीतकर योगासन की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी।
अहमदाबाद के ईकेए एरिना में आयोजित इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में भारत ने लगभग हर आयु वर्ग और स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय दल की सफलता ने न केवल देश की पारंपरिक योग विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई, बल्कि योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।
पदक तालिका में जापान तीन स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं अर्जेंटीना ने तीसरा स्थान हासिल किया। अर्जेंटीना की खिलाड़ी नाबिला बर्राजा प्रतियोगिता की सबसे सफल व्यक्तिगत एथलीट रहीं, जिन्होंने दो स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर अपनी टीम को शीर्ष देशों में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
कुल पदकों की संख्या के आधार पर नेपाल भारत के बाद दूसरा सबसे सफल दल साबित हुआ। नेपाल ने एक स्वर्ण, 36 रजत और 15 कांस्य पदकों के साथ कुल 52 पदक अपने नाम किए। उज्बेकिस्तान ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 25 पदक जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 31 देशों के खिलाड़ियों ने पदक जीते। यह तथ्य योगासन की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाता है। आयोजन ने विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल भावना को भी मजबूती प्रदान की।
प्रतियोगिता के अंतिम दिन भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। आर्टिस्टिक पेयर, रिदमिक पेयर, हैंड बैलेंस, बैक बेंड, ट्विस्टिंग बॉडी और सुपाइन इंडिविजुअल जैसी स्पर्धाओं में भारतीय प्रतिभाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश को गौरवान्वित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय