राष्ट्रीय सहकारिता नीति के क्रियान्वयन पर बनी समिति की पहली बैठक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने पर जोर

युगवार्ता    09-Jun-2026
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सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी मंगलवार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में बैठक की अध्यक्षता करते हुए


नई दिल्ली, 09 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत गठित राष्ट्रीय स्तर की नीति कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की पहली बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सहकारी संस्थाओं के बीच समन्वित कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने की। उन्होंने कहा कि मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देंगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

भूटानी ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, पेशेवर रूप से संचालित और सदस्य-केंद्रित आर्थिक संस्थाओं में बदलने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। उन्होंने सभी हितधारकों से नीति के उद्देश्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

बैठक में नीति के छह प्रमुख स्तंभों पर चर्चा हुई, जिनमें सहकारी क्षेत्र की बुनियाद मजबूत करना, संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी बनाना, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना, समावेशिता बढ़ाना, नए क्षेत्रों में सहकारिता की भूमिका का विस्तार करना और युवाओं को सहकारी आंदोलन से जोड़ना शामिल है।

समिति ने पंचायत राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, मत्स्य पालन विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग समेत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वित कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया।

बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने, प्रत्येक जिले में आदर्श सहकारी गांव बनाने, सभी पंचायतों तक सहकारी संस्थाओं की पहुंच सुनिश्चित करने, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार तथा डिजिटल प्रबंधन प्रणालियों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों की समीक्षा की गई।

इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, पीएसीएस के कंप्यूटरीकरण, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं के गठन की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

बैठक में महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों की भागीदारी बढ़ाने, सहकारी संस्थाओं को नए बाजारों से जोड़ने तथा सदस्य संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। राष्ट्रीय सहकारिता नीति का लक्ष्य वर्ष 2035 तक सहकारी क्षेत्र की सदस्यता 50 करोड़ तक पहुंचाना और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाना है।

समिति ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का सफल क्रियान्वयन केंद्र, राज्यों, सहकारी संस्थाओं और अन्य सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से सुनिश्चित किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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