
साउथम्प्टन, 10 जुलाई (हि.स.)।
भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का अंतिम मुकाबला शनिवार को साउथम्प्टन में खेला जाएगा। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम पहले ही सीरीज गंवा चुकी है और अब उसकी कोशिश 0-4 से क्लीन स्वीप होने की शर्मनाक स्थिति से बचने की होगी।
बेलफास्ट से शुरू हुआ भारत का यह दौरा अब साउथम्प्टन पहुंच चुका है, लेकिन छह शहरों की यात्रा के बावजूद एक चीज नहीं बदली है—श्रेयस अय्यर अभी भी बतौर कप्तान अपनी पहली जीत का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय पुरुष टीम के लिए यह 2006 में पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलने के बाद सबसे लंबा जीत का सूखा बन गया है।
पूरी श्रृंखला में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। मैनचेस्टर में टीम ने कुछ देर तक मुकाबला किया, लेकिन नॉटिंघम में केवल 76 रन पर सिमट गई। वहीं ब्रिस्टल में इंग्लैंड ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में भारत को पूरी तरह पछाड़ दिया।
अगर भारत अंतिम मुकाबला जीत भी लेता है तो सीरीज नहीं बचा पाएगा, लेकिन 1-3 की हार 0-4 के क्लीन स्वीप से कहीं बेहतर मानी जाएगी।
भारतीय बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती जोफ्रा आर्चर और जॉश टंग की तेज गेंदबाजी रही है। वहीं सैम करन की धीमी और स्किड होने वाली गेंदों ने भी उन्हें लगातार परेशान किया। गेंदबाजी में भारत की मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि वरुण चक्रवर्ती और हर्षित राणा हैमस्ट्रिंग चोट के कारण बाहर हो गए हैं। इसके अलावा दूसरे मैच में रवि बिश्नोई के एक ओवर में 29 रन खर्च करने के बाद टीम चयन भी कठिन हो गया है।
बल्लेबाजी में भारत युवा वैभव सूर्यवंशी पर भरोसा बरकरार रख सकता है, हालांकि वह शॉर्ट गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे हैं। संजू सैमसन का प्लेइंग इलेवन और जिम्बाब्वे दौरे दोनों से बाहर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि उन्हें मौका दिया जाता है तो तिलक वर्मा को बाहर बैठना पड़ सकता है और शीर्ष क्रम में बदलाव करना होगा।
दूसरी ओर इंग्लैंड ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन किया है। उसकी तेज गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा, जबकि विल जैक्स, आदिल राशिद और लियाम डॉसन ने अपनी विविधताओं से भारतीय बल्लेबाजी को बांधे रखा। बल्लेबाजी में फिल सॉल्ट, जोस बटलर, हैरी ब्रूक और जैकब बेथेल ने घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाया।
अब श्रेयस अय्यर और टीम इंडिया के पास साउथम्प्टन में आखिरी मौका है कि वह सम्मान बचाते हुए जीत के साथ इस कठिन दौरे का समापन करे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे