मप्र के ग्वालियर में सीए से 21.05 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में साइबर सेल ने 1.82 करोड़ कराए फ्रीज

युगवार्ता    12-Jul-2026
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साइबर ठगी (प्रतीकात्मक)


ग्वालियर, 12 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देकर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में राज्य साइबर सेल ने रविवार को नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल की मदद से 1.82 करोड़ रुपये फ्रीज कराए हैं।

राज्य साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि ठगी करने वाला गिरोह विदेश से संचालित हो रहा है। इस मामले की जांच कर रही है। ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए पहली बार 12 लेयर का इस्तेमाल किया गया। इन 12 लेयर में अब तक 19,332 बैंक खाते चिन्हित किए गए हैं, जिनमें राशि 15 राज्यों के खातों में ट्रांसफर हुई। इनमें 1.82 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए, जबकि शेष रकम एक खाते से दूसरे और फिर कई अन्य खातों में ट्रांसफर होने के बाद निकाल ली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि यूएसडीटी के जरिए रकम विदेश भेज दी गई।

दरअसल, ग्वालियर के रोशनी घर रोड निवासी मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अशोक विजयवर्गीय ने शनिवार देर शाम साइबर सेल में अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। राज्य साइबर सेल को दी गई शिकायत के अनुसार, 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के मोबाइल पर दिसंबर 2025 में +91-8151931249 नंबर से एक मैसेज आया। मैसेज करने वाली महिला ने 'हैलो, मैं दिव्या हूं लिखकर नाम बताया। खुद को निवेश सलाहकार बताया।

इस दौरान उसने दावा किया कि यूएसडीटी (यूएस डॉलर टेथर) क्रिप्टो ट्रेडिंग में निवेश कर कुछ ही समय में कई गुना मुनाफा कमाया जा सकता है। भारतीय मोबाइल नंबर से बातचीत शुरू हुई, लेकिन बाद में अन्य मोबाइल नंबरों और एक विदेशी नंबर +1 (516) 713-7291 के जरिए संपर्क जारी रहा। ठगों ने उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर निवेश शुरू करा दिया।

ठगों ने शुरुआत में निवेश पर अच्छा रिटर्न दिखाकर अशोक विजयवर्गीय का भरोसा जीत लिया। फिर, 7 जनवरी को उन्होंने 1.88 लाख रुपये वास्तव में उनके एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर भी कर दिए। रकम खाते में आने के बाद उन्हें भरोसा हो गया कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में लगातार करोड़ों रुपए निवेश करना शुरू कर दिया। फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर उनका मुनाफा लगातार बढ़ता हुआ दिखाया जाता रहा। कुछ समय बाद फर्जी पोर्टल पर उनके निवेश का मुनाफा बढ़कर 33.25 करोड़ रुपए तक दिखने लगा। जब उन्होंने यह राशि निकालने का प्रयास किया तो भुगतान रोक दिया गया। ठगों ने कहा कि रकम निकालने से पहले 10.84 करोड़ रुपये इनकम टैक्स के रूप में जमा करने होंगे।

बाद में उन्होंने भरोसा दिलाने के लिए कहा कि वे अपनी ओर से 5.34 करोड़ रुपये जमा कर देंगे। बाकी रकम पीड़ित जमा कर दें। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। फिर 'रिस्क मार्जिन' के नाम पर 1 करोड़ रुपये और मांगे गए। तभी अशोक विजयवर्गीय को एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। पीड़ित ने साइबर सेल को व्हाट्सएप चैट, बैंक ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट और 20 से अधिक बैंक खातों का पूरा विवरण सौंपा है। इन खातों में फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, केनरा बैंक और यस बैंक समेत कई बैंकों के खाते शामिल हैं, जिनमें अलग-अलग समय पर रकम ट्रांसफर कराई गई।

राज्य साइबर सेल के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर वरिष्ठ सीए अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ पांच लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि ठगों के इस्तेमाल किए गए तीन वाट्सएप नंबर, 20 बैंक खाते और फर्जी यूआरएल ट्रेडिंग पोर्टल की तकनीकी जांच की जा रही है।

वहीं, राज्य साइबर सेल के इंस्पेक्टर (विवेचक) मुकेश नारोलिया ने बताया कि 15 राज्यों के 19 हजार से अधिक खातों तक रकम पहुंच चुकी है। चाइनीज एप के जरिए वर्चुअल कॉल कर ठगी की गई, जिनमें से 1.82 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए हैं। अब साइबर सेल पहली से तीसरी लेयर तक के करीब 800 बैंक खातों की जांच कर रही है। इन खातों के धारकों की जानकारी के लिए संबंधित बैंकों को ईमेल भेजे गए हैं। जानकारी मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने जांच में पता चला कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय ने खुद 76 बैंक खातों में 106 ट्रांजेक्शन किए थे। एफआईआर में 25 खातों का उल्लेख था, लेकिन बैंक स्टेटमेंट की जांच में 76 खातों का खुलासा हुआ। इसके बाद यही रकम 12 लेयर में घूमते हुए 19 हजार से अधिक खातों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि यदि समय पर शिकायत मिलती तो अधिक रकम बचाई जा सकती थी। फिलहाल खाताधारकों की पहचान की जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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