धार्मिक सौहार्द प्रेम की ही तरह एक तरफा नहीं हो सकता : अर्जुनराम मेघवाल

युगवार्ता    12-Jul-2026
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कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन करते केंद्रीय मंत्री एवं उपस्थित महानुभव


नई दिल्ली, 12 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को कहा कि देश में धार्मिक सौहार्द बनाए रखना केवल एक समुदाय की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रेम कभी भी एक तरफा नहीं होता उसके लिए परस्पर भाव चाहिए। अगर वर्तमान परिस्थितियां अलग है तो आजादी के समय देश का विभाजन क्यों हुआ। उनका यह बयान वर्तमान सरकार की इस विषय को लेकर हो रही आलोचनाओं के संदर्भ में था।

जनसत्ता के संपादक रहे स्वर्गीय प्रभाष जोशी की स्मृति में आयोजित 17वें 'प्रभाष प्रसंग' स्मृति व्याख्यान का राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडप में आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि रहे, जबकि ‘कौमी संवादिता की मधुशाला’ पर स्मारक व्याख्यान प्रोफेसर सुदर्शन अयंगर ने दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रभास स्मृति न्यास के अध्यक्ष बनवारी ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार पद्मभूषण रामबहादुर राय भी उपस्थित रहे।

इस दौरान मुख्य अतिथि अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “प्रेम कभी एकतरफा नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ ठीक होता तो देश का विभाजन नहीं होता।” उन्होंने उनसे पिछले वक्ता की ओर से कबीर को नजरअंदाज किए जाने खंडन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे जुड़े तीर्थ स्थल ‘मगहर’ में कबीर से जुड़े विकास कार्यों पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अहमदाबाद के एक प्रबंधन संस्थान में कबीर के विचार पढ़ाए जा रहे हैं तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास का नाम 'कबीर कुटीर' रखा गया है।

स्मारक व्याख्यान देते हुए डॉ सुदर्शन अयंगर ने कहा कि देश सामाजिक और वैचारिक संकट के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया और सोशल मीडिया समाज को एक विशेष दिशा में प्रभावित कर रहे हैं, जबकि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में धार्मिक एकता और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने धर्म से प्रेम और दूसरे धर्म का सम्मान करना ही प्रभाष जोशी की पत्रकारिता का मूल संदेश था।

अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम प्रश्न गांधी के समय भी था और आज भी है और विपरीत विचारों को समावेशी होने में एक समय लगता है। उन्होंने कहा कि केवल प्रेम से सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होता। हालांकि भारत की विशेषता यह है कि यहां विपरीत विचारों और मान्यताओं वाले लोग भी साथ रह सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्य का स्वयं निर्धारण करना होगा और इसके लिए उन्हें गांधी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।

वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कार्यक्रम में इस बात को लेकर चिंता जाहिर की कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पर्याप्त आत्ममंथन नहीं हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में विमोचित प्रभाष जोशी के 41 लेखों के संकलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभाष जोशी जनोन्मुखी पत्रकारिता के प्रबल समर्थक थे और उनका मानना था कि पत्रकारिता समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बननी चाहिए।

कार्यक्रम में ‘इमर्जेंसी के पचास साल: अनुभव, अध्ययन व सबक’ और 'पत्रकारिता का युगधर्म' पुस्तक का लोकार्पण किया गया। स्वागत भाषण मनोज मिश्र ने दिया तथा कार्यक्रम का संचालन धीरेंद्र राय ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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