मप्र के भोपाल में छात्रवृत्ति योजना में करीब एक करोड़ का घोटाला, छह लोगों पर एफआईआर दर्ज

युगवार्ता    13-Jul-2026
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छात्रवृत्ति घोटाला (प्रतीकात्मक)


भोपाल, 13 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी छात्रवृत्ति राशि में कथित हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि एमबीए छात्रों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना बैंक खाते खोले गए और इन खातों में जमा छात्रवृत्ति की राशि को कथित तौर पर निकाल लिया गया।

मामले में कॉलेज से जुड़े लोगों और बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2020 से 2021 के बीच करीब 99.48 लाख रुपये की सरकारी छात्रवृत्ति राशि संदिग्ध तरीके से दूसरे खातों में पहुंचाई गई। इस मामले में सीबीआई ने सोमवार को यूको बैंक की हबीबगंज शाखा की तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक के अलावा भोपाल के एक निजी एमबीए कॉलेज से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

118 बैंक खातों में जमा हुई छात्रवृत्ति राशि

मामला तब सामने आया जब यूको बैंक के उप महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख लोकेश कुमार ने हबीबगंज शाखा में खोले गए 118 बैंक खातों में अनियमितताओं की शिकायत की। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जांच शुरू की।

एफआईआर के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कई एमबीए छात्रों के नाम पर ऐसे खाते खोले गए, जिनकी जानकारी स्वयं छात्रों को नहीं थी। इन खातों में सरकारी छात्रवृत्ति की रकम जमा कराई गई, लेकिन राशि का उपयोग छात्रों के बजाय कथित रूप से अन्य लोगों ने किया।

सीबीआई के अनुसार, जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच 118 संदिग्ध खातों में सरकार से प्राप्त करीब 99.48 लाख रुपये जमा हुए, जिनके दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि छात्रों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। सीबीआई का कहना है कि खाता खोलने की प्रक्रिया में आवश्यक केवायसी नियमों का पालन नहीं किया गया।

आरोप है कि कॉलेज से जुड़े लोगों ने बैंक खातों में अपने या परिचितों के मोबाइल नंबर दर्ज करवाए, जिससे ओटीपी प्राप्त किए जा सकें। इसके अलावा एटीएम कार्ड भी छात्रों तक पहुंचने के बजाय कथित रूप से अन्य लोगों के पास रहे और उन्हीं के माध्यम से छात्रवृत्ति की रकम निकाली गई।

अवधपुरी स्थित निजी कॉलेज जांच के घेरे में

जांच जिस कॉलेज से जुड़ी है, वह भोपाल के अवधपुरी क्षेत्र में स्थित एक निजी बिजनेस स्कूल है। कॉलेज की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी। यह एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय से संबद्ध बताया गया है। संस्थान का संचालन लाला राम रखामल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है और यहां दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम संचालित होता है।

इन लोगों को बनाया गया आरोपी

सीबीआई ने मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें यूको बैंक हबीबगंज शाखा की तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक प्रेमा वर्मा के अलावा कॉलेज के निदेशक विनय मल्होत्रा, प्रोफेसर आदित्य मल्होत्रा, सहायक प्रोफेसर मनोज जैन, विनेश मेश्राम और तत्कालीन कर्मचारी राम सिंह वर्मा के नाम शामिल हैं। एफआईआर में कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई ने बैंक की तत्कालीन प्रबंधक पर आरोप लगाया है कि उन्होंने खाता खोलने, केवायसी सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और एटीएम जारी करने की प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का पालन नहीं किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि नियमों की अनदेखी के कारण फर्जी खाते खोले जा सके और छात्रवृत्ति राशि निकाली गई।

कॉलेज ने आरोपों से किया इनकार

मामले में कॉलेज पक्ष ने बैंक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कॉलेज प्रतिनिधियों का कहना है कि छात्रवृत्ति योजना में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है। उनका दावा है कि मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और कॉलेज प्रशासन सीबीआई जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

फर्जी केवायसी और मोबाइल नंबर से खुला पूरा खेल

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, संदिग्ध खातों में कथित रूप से गलत जानकारी दर्ज की गई। दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर और प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि खातों से जुड़े मोबाइल नंबर भी छात्रों के बजाय अन्य लोगों के थे, जिससे छात्रवृत्ति की रकम आते ही उसे निकाला जा सके।

अब सीबीआई पूरे मामले में दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, खातों के लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित छात्रवृत्ति घोटाले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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