
रायपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सक्ति जिले के वेदांता पावर प्लांट हादसे में 25 मजदूरों की मौत का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से गूंजा, जिससे सदन में भारी हंगामा हुआ। इस औद्योगिक हादसे को लेकर विपक्ष (कांग्रेस) ने सरकार को घेरा और उद्योगपति अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी व जांच की स्थिति पर सवाल किए। यह हादसा 14 अप्रैल 2026 को हुआ था।
इस मुद्दे को लेकर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने सदन का वॉकआउट (बहिर्गमन) कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने सवाल किया कि क्या अनिल अग्रवाल पर दबाव बनाने के लिए एफआईआर हुई है? क्या सभी औद्योगिक दुर्घटनाओं में निदेशक पर कार्रवाई होगी? उद्योग मंत्री से जवाब नहीं मिलने पर विपक्ष ने वॉक आउट किया।
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रदेश में घटित औद्योगिक दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विगत दो वर्षों में कितनी औद्योगिक दुर्घटना हुई है? मंत्री जी ने जो परिशिष्ट दिया है उसमें जो कारण मिला है। वह सेफ्टी ऑडिट ना होने के कारण दुर्घटनाएं हुई है? क्या कोई नोटिस दिया गया है, या जांच कराई गई है? सेफ्टी ऑडिट कितने साल में होना चाहिए?
उद्योग मंत्री देवांगन ने इसका जवाब देते हुए बताया कि खतरनाक रसायनों के निर्माण भंडारण और संबंधित नियम के अनुसार एक बार ग्राह्य एजेंसियों से ऑडिट कराया जाता है। अब तक प्रदेश के 32 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट हुआ है। जहां नहीं हुआ है, वहां कार्यवाही करने का भी प्रावधान है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सक्ती में वेदांता पावर प्लांट में जो हादसा हुआ था, वहां केवल 2 लोगों को ही आरोपित बताया गया है? इस पर मंत्री ने कहा कि और लोगों को भी आरोपित बनाया गया है, जो प्रक्रियाधीन है। श्रम विभाग द्वारा भी श्रम न्यायालय में भी मुकदमा दायर किया गया है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब पुलिस के दस्तावेज में अनिल अग्रवाल का नाम है, तो उसे पकड़ने के लिए क्या कार्यवाही कर रहे हैं? इस पर मंत्री ने कहा कि जल्द ही कार्यवाही करेंगे। पुलिस मुस्तैदी से जांच कर रही है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इस पर डॉ. महंत ने कहा कि कई लोगों के द्वारा अलग-अलग जांच की जा रही है जानकारी देंगे? मंत्री ने बताया कि पुलिस के द्वारा फैक्टरी एक्ट के तहत जांच की जा रही है।
चंद्रपुर से कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने कहा कि यह मामला पूरे प्रदेश का सबसे बड़ा मामला है। प्रभावित मजदूरों को यहाँ की सरकार और दिल्ली की सरकार ने पैसे देने की घोषणा की थी, लेकिन वो अब तक नहीं दिया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा हादसा होने के बावजूद उनके बचे हुए भुगतान अभी तक नहीं दिए गए हैं। इस पर मंत्री ने जानकारी दी कि कि कंपनी द्वारा आश्रितों को 35-35 लाख का मुआवजा दिया गया है। मुख्यमंत्री के घोषणा के अनुसार 5 लाख रुपये और केंद्र द्वारा 2 लाख देने को कहा गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि जब अनिल अग्रवाल पर एफआईआर हुई है, तब हमने भी सोचा सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। क्या आगे भी इस तरह जो डायरेक्टर गलत करेंगे, उन पर एफआईआर होगी या फिर केवल इसी मामले पर हो रही है।
पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या अनिल अग्रवाल के ऊपर दवाब बनाकर किसी और को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। केवल अनिल अग्रवाल पर कार्यवाही हुई है। आज तक उस पर दबाव बनाने के लिए क्या यह कार्यवाही की जा रही है? मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने सदन का बहिर्गमन कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा