
लखनऊ, 14 जुलाई (हि.स.)। लखनऊ प्रवास के दूसरे दिन एक राष्ट्र, एक चुनाव विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानमंडल के पीठासीन अधिकारियों, विपक्ष के नेताओं तथा कुछ निर्वाचित सदस्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया।
समिति ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों से भी भेंट कर प्रस्तावित व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक के दौरान प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों, विधायी प्रक्रिया, संघवाद जैसे संवैधानिक सिद्धांतों, भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियों, केंद्र-राज्य संबंधों पर संभावित प्रभाव तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
इसके बाद समिति ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] तथा अपना दल (एस) के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियों के दृष्टिकोण एवं विचार समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।
चर्चा के दौरान निर्वाचन सुधारों की आवश्यकता, एक राष्ट्र, एक चुनाव की उपयोगिता, निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियों का संविधान की मूल संरचना एवं संघीय ढांचे पर संभावित प्रभाव तथा इस व्यवस्था के अंतर्गत आवश्यक संवैधानिक एवं विधिक सुरक्षा उपायों पर विचार किया गया, ताकि कानूनी एवं सामाजिक-राजनीतिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
समिति ने इसके उपरांत विभिन्न व्यापार एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। इनमें एक्ज़िम बैंक , राष्ट्रीय अवसंरचना वित्त एवं विकास बैंक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय , भारतीय उद्योग परिसंघ , एसोचैम , इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स तथा आदर्श व्यापार मंडल सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधियों ने समिति को बार-बार होने वाले चुनावों तथा उसके परिणामस्वरूप लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्यों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों, उद्योग, अर्थव्यवस्था तथा समाज के विभिन्न वर्गों पर इसके प्रभावों के संबंध में भी अपने विचार साझा किए।
समिति ने विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त किए तथा सभी व्यापार एवं उद्योग संगठनों से अनुभवजन्य आंकड़ों एवं अध्ययनों सहित विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आग्रह किया, ताकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तार्किक निष्कर्षों पर पहुंचा जा सके। दिनभर चले विस्तृत विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद के उपरांत संयुक्त संसदीय समिति ने दिन की कार्यवाही समाप्त की।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह