
मुंबई, 15 जुलाई (हि.स.)। शिवसेना यूबीटी के नेता और पूर्व सांसद विनायक राउत और उनके बेटे पार्षद गीतेश राणे की बुधवार को बहू प्रताडऩा मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में पुलिस इन दोनों आरोपित पिता- पुत्रों को किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है, इसका कारण आज ठाणे जिला न्यायालय ने राऊत पिता -पुत्रों की अग्रिम जमानत की अर्जी पर तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया है। इस अर्जी पर सुनवाई न्यायालय में 23 जुलाई को होगी, इस तरह आज न्यायालय से राउत पिता-पुत्र को कोई राहत नहीं मिली है।
विनायक राउत की बहू गिरिजा राउत ने अपने पति गीतेश राउत, ससुर विनायक राउत और परिवार के कुल 7 सदस्यों के खिलाफ घरेलू उत्पीडऩ और अंधविश्वास रोकथाम एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है। गिरिजा राउत ने अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाया है कि उनके पति शारीरिक संबंध बनाने में असमर्थ थे, इसलिए उनके ससुराल वालों ने जादू-टोना और अघोरी उपायों का सहारा लिया। इस मामले में पुलिस अघोरी कृत्य करने वाले ढोंगी फिरोज शेख को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल पुलिस हिरासत में है। इसी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए विनायक राउत और उनके बेटे गीतेश राऊत ने ठाणे जिला न्यायालय ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था और जल्द सुनवाई की मांग की थी। लेकिन न्यायालय नेपूर्व सांसद विनायक राऊत की अग्रिम जमानत की अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग को अस्वीकार कर दिया और मामले की सुनवाई के लिई 23 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।
न्यायालय के इस निर्णय के बाद विनायक राऊत की बहू गीतेश राऊत के वकील ने पत्रकारों को बताया कि इस मामले में न्यायालय ने अग्रिम जमानत के आवेदन पर २३ जुलाई को सुनवाई करने का मुकर्रर किया है। इसलिए आरोपितों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। मामले में पूछताछ के लिए पुलिस को जल्द विनायक राऊत और उनके बेटे को तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव