प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को जालंधर से संत रविदास एक्सप्रेस को दिखाएंगे हरी झंडी

युगवार्ता    16-Jul-2026
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चंडीगढ़, 16 जुलाई (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 जुलाई को जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन से संत रविदास एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। अमृतसर और वाराणसी के बीच चलने वाली यह पहली सीधी वातानुकूलित ट्रेन होगी। रविदासिया समुदाय लंबे समय से इस रेल सेवा की मांग कर रहा था।

प्रधानमंत्री दोपहर 3.40 बजे जालंधर कैंट से उद्घाटन ट्रेन को रवाना करेंगे। यह रेल सेवा गुरु रविदास जी की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर, वाराणसी जाने वाले पंजाब के श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक होगी। प्रधानमंत्री ने कुछ महीने पहले डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से भी मुलाकात की थी। संत रविदास एक्सप्रेस में कुल 18 कोच होंगे। इनमें दो एसी थ्री-टियर, एक एसी टू-टियर, छह द्वितीय श्रेणी सामान्य, सात थ्री-टियर स्लीपर और दिव्यांग यात्रियों के लिए एक विशेष कोच शामिल होगा। ट्रेन में आरामदायक बर्थ, बायो-वैक्यूम शौचालय, सीसीटीवी निगरानी और आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

यह ट्रेन अमृतसर के छेहरटा से वाराणसी के बीच बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेगी तथा अगले दिन वापसी करेगी। करीब 1,048 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ट्रेन अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर सिटी और वाराणसी सहित 12 स्टेशनों पर रुकेगी। हर वर्ष पंजाब सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर सीर गोवर्धनपुर पहुंचते हैं। पंजाब के दोआबा क्षेत्र से बड़ी संख्या में रविदासिया समुदाय के श्रद्धालु वाराणसी जाते हैं। गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व के दौरान अगले वर्ष श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विशेष टेंट सिटी बनाने की भी योजना है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभी जम्मू तवी से वाराणसी और उससे आगे के लिए तीन से चार ट्रेनें चलती हैं। फिरोजपुर से बिहार जाने वाली कुछ ट्रेनें भी वाराणसी होकर गुजरती हैं। इसके अलावा अमृतसर से असम, कोलकाता और टाटानगर सहित विभिन्न स्थानों के लिए चलने वाली पांच ट्रेनों का वाराणसी में ठहराव है, लेकिन अब तक अमृतसर से वाराणसी तक कोई सीधी ट्रेन उपलब्ध नहीं थी।

डेरा सचखंड बल्लां के पूर्व महासचिव सतपाल विरदी ने नई ट्रेन सेवा पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे गुरु रविदास जयंती के दौरान श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या मौजूदा ट्रेनों की क्षमता से कहीं अधिक होती है। डेरा समय-समय पर विशेष बेगमपुरा एक्सप्रेस का खर्च स्वयं वहन करता रहा है, जिस पर करीब 20 से 40 लाख रुपये खर्च होते हैं और वह ट्रेन वातानुकूलित नहीं होती।

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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH

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