
मुंबई, 18 जुलाई (हि.स.)। वरिष्ठ समाजवादी नेता और गांधीवादी आंदोलन की एक अहम आवाज डॉ कुमार सप्तर्षि (84) का शनिवार को पुणे में स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 84 साल के थे। उनके बेटे डॉ कबीर लंदन में हैं और उम्मीद है कि वे शनिवार देर रात तक पुणे पहुंचेंगे। डॉ कुमार सप्तर्षि का पार्थिव शरीर सोमवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोगों के दर्शन के लिए गांधी भवन में रखा जाएगा। इसके बाद पुणे में ही डॉ कुमार सप्तर्षि का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
डॉ कुमार सप्तर्षि के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ सप्तर्षि डायबिटीज से पीडि़त थे। शनिवार को तबीयत खराब होने पर उन्हें एरंडवाने के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हॉस्पिटल में इलाज से पहले ही उन्होंने आखिरी सांस ली। कुमार सप्तर्षि का जन्म 21 अगस्त 1939 को अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका के खेड़ गांव में हुआ था। उनके पिता एक सरकारी डॉक्टर थे। उन्होंने पांचवीं क्लास के बाद शहर में पढ़ाई की। बीएसी के बाद उन्होंने एमबीबीएस तक की पढ़ाई की। 1956 से 1960 के बीच महाराष्ट्र और देश के बदलते हालात ने सप्तर्षि के पॉलिटिकल विचारों की नींव रखी।
कुमार सप्तर्षि ने एक आर्टिकल में कहा था कि नीलू फुले की वजह से उनका सोशलिज्म से परिचय हुआ था। जब कुमार सप्तर्षि कॉलेज में थे, तब उन्होंने नीलू फुले को एक लोक नाटक डायरेक्ट करने के लिए बुलाया था। इस दौरान, नीलू फुले ने कुमार सप्तर्षि को सोशलिज्म पर किताबें पढऩे के लिए दी थीं। साथ ही, नीलू फुले की वजह से ही उनकी मुलाकात सोशलिस्ट लीडर डॉ. राम मनोहर लोहिया से हुई और उसके बाद, कुमार सप्तर्षि ने जिंगदी भर सोशलिस्ट आइडियोलॉजी का समर्थन किया। 1967 में, कुमार सप्तर्षि ने युवाओं को ऑर्गनाइज़ करने और सोशियो-पॉलिटिकल बदलाव लाने के मकसद से सिंहगढ़ में युवक क्रांति दल की स्थापना की। डॉक्टर बनने के बाद, कुमार सप्तर्षि ने पुणे में एक क्लिनिक शुरू किया। पांच साल प्रैक्टिस करने के बाद, यानी 1969 के आस-पास, वे फुल-टाइम युवक क्रांति दल के एक्टिविस्ट के तौर पर एक्टिव हो गए। वे कई सोशल मूवमेंट में सक्रिय सहभागी हुए । उन्होंने एजुकेशनल रिफॉर्म, यूथ एम्पावरमेंट और डेमोक्रेटिक राइट्स के लिए ज़ोरदार आंदोलन किया। इससे डॉ. कुमार सप्तर्षि पर इन आंदलनों के लिए उन्हें कम से कम 62 बार अरेस्ट किया गया था।
1977 में, कुमार सप्तर्षि और उनके कुछ साथी जयप्रकाश नारायण की सलाह पर जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1978 में, वे अहमदनगर (आज का अहिल्यानगर) सीट से विधायक के रुप में चुने गए। देश सेवा, सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए डॉ. कुमार सप्तर्षि ने ११ पुस्तकों का सृजन किया इनमें हम स्टूडेंट्स और हमारे दंगे , संकल्प, यात्री, चंद्रशेखर , मोहनदास गांधी आदि शामिल हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( राकांपा एसपी ) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि सीनियर सोशलिस्ट लीडर, प्रोग्रेसिव विचारक, 'युवक क्रांति दल' (युक्रांड) के फाउंडर और महाराष्ट्र गांधी मेमोरियल फंड के प्रेसिडेंट डॉ. कुमार सप्तर्षि के निधन की खबर बहुत दुखद है। डॉ. कुमार सप्तर्षि महाराष्ट्र के जाने-माने प्रोग्रेसिव विचारक थे। डेमोक्रेटिक वैल्यूज़ पर ज़ोर देते हुए, वे सोशल जस्टिस की लड़ाई में हमेशा सबसे आगे रहते थे। आज जब समाज अजीब हालात से गुजऱ रहा है, जब नफऱत, हिंसा, आर्थिक असमानता जैसे ट्रेंड बढ़ रहे हैं, ऐसे में गांव के विकास, इंसानियत और गांधीवाद का विचार रखने वाले डॉ. कुमार सप्तर्षि सर जैसे व्यक्तित्व का जाना बहुत बड़ी क्षति है। लेजिस्लेटिव काउंसिल के मेंबर के तौर पर उन्होंने हाउस में जो छाप छोड़ी और एक सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर सडक़ों पर जो संघर्ष किया, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। उनके ज़रिए गांधीवादी विचारों का एक सच्चा चैंपियन चला गया, उन्हें मेरी दिल से श्रद्धांजलि!
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव