
नई दिल्ली, 19 जुलाई (हि.स.)। संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख करते हुए इस विषय पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने अलग गुट बनाने वाले सदस्यों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई। विरोध दर्ज कराने के लिए विपक्ष के कुछ नेताओं ने सांकेतिक रूप से कुछ समय के लिए बैठक का बहिर्गमन भी किया।
सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर रक्षा मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से संसद को सुचारु रूप से चलाने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा में भाग लेने का अनुरोध किया।
रिजिजू ने बताया कि सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। उन्होंने विपक्ष से इन विधेयकों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा कर उन्हें पारित कराने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि चर्चा से दूर रहकर केवल हंगामा करने से विपक्ष को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को चर्चा में भाग लेना चाहिए। बैठक में कई छोटे दलों के नेताओं ने भी अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने की मांग की। इस पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि यदि सदन सुचारु रूप से चलेगा तो सभी दलों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
रिजिजू ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने सुझाव और विचार रखे, जिन्हें सरकार ने गंभीरता से सुना है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में अलग-अलग मतों का सामने आना स्वाभाविक है और प्रत्येक राजनीतिक दल को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा