एआई को सिर्फ अपनाएं नहीं, बल्कि इसका बुद्धिमानी से उपयोग करें : डॉ. जितेंद्र सिंह

युगवार्ता    02-Jul-2026
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29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 प्रदान किए गए।


केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह


जयपुर, 02 जुलाई (हि.स.)। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी से यह सम्मेलन और अधिक व्यापक हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का सतत प्रयास है कि सुशासन के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए।

डॉ. सिंह ने गुरुवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में आयोजित 29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस (एनसीईजी) के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अप्रासंगिक एवं पुराने कानूनों को समाप्त कर अभूतपूर्व पहल की है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिली है। उन्होंने मिशन कर्मयोगी और सीपीग्राम्स जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के सुशासन मॉडल आज वैश्विक स्तर पर अपना दमखम दिखा चुके हैं। देश के ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक नवाचारों को मॉरीशस, मालदीव, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका सहित अनेक देशों ने अपनाया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान भी ई-गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन की दिशा में अग्रणी है। इसका प्रमाण यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पहली पसंद राजस्थान है।

डॉ. सिंह ने कहा कि शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि असली चुनौती सिर्फ एआई को अपनाने में नहीं, बल्कि इसे बुद्धिमानी से उपयोग करने में है, जिसमें तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय हस्तक्षेप भी अनिवार्य है। उन्होंने विभिन्न राज्यों की सरकारों से आह्वान किया कि वे सिर्फ भारत@2047 के दूरदर्शी लक्ष्य पर ध्यान न देकर लघु अवधि के मापने योग्य मील के पत्थर निर्धारित करें। डॉ. सिंह ने बदलाव की रफ्तार को समझाते हुए वीसीआर और एसटीडी बूथ जैसी पुरानी तकनीकों का उदाहरण दिया, जो मात्र दो दशकों में गायब हो गईं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि 2047 में राजकीय अधिकारियों की क्या भूमिका होगी, क्योंकि डिजिटल सिस्टम तेज गति से पारंपरिक राजकीय कार्य पद्धति को बदल रहे हैं।

जिम्मेदार और समावेशी आई की दिशा में आगे बढ़ रहा है देश

राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि एक ओर जहां दुनिया एआई की चर्चा कर रही है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 'जिम्मेदार और समावेशी एआई' की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल नवाचार करना नहीं, बल्कि उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना भी है।

कर्नल राठौड़ ने कहा कि यह सम्मेलन गवर्नेंस को और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे परिवर्तन की नई शुरुआत है। इस सम्मेलन ने हमें तकनीक का उपयोग कर शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा प्रदान की है। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए सभी सुझावों, अनुभवों और नवाचारों का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा और उनमें से उपयोगी मॉडलों को राज्य के विभिन्न जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन का अंत नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की शुरुआत है। उन्होंने सम्मेलन को सफल बनाने वाले सभी संगठनों को धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि राजस्थान तकनीक-संचालित शासन और सुरक्षा में अग्रणी रहेगा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उद्धरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि ई-गवर्नेंस केवल 'मैनेजिंग सिस्टम' तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि 'मैनेजिंग पॉसिबिलिटीज' का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन का राजस्थान को व्यापक लाभ मिलेगा। सम्मेलन के दौरान लगभग 200 वक्ताओं ने डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े अपने अनुभव, नवाचार और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां साझा कीं। वहीं करीब 100 डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से सरकार और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करते हुए उन्हें एक-दूसरे निकट लाना है। जिससे देश के प्रत्येक नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर एक जिम्मेदार, जवाबदेह एवं पारदर्शी शासन व्यवस्था विकसित की जा सके।

इससे पहले केंद्रीय प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों के लिए 1.65 लाख ग्राम पंचायतों से नामांकन प्राप्त हुए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि नवाचार अब केवल चुनिंदा उत्कृष्ट केंद्रों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि गांवों तक भी अपनी मजबूत पहुंच बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में प्रदान किए जाने वाले ये पुरस्कार केवल सफलता की कहानियां नहीं हैं, बल्कि इनमें राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बनने की क्षमता भी है।

समारोह में जयपुर सांसद मंजू शर्मा भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर जयपुर डिक्लेरेशन जारी किया गया। साथ ही साइटेशन बुकलेट, एक्सीलेंस बुकलेट और कंपेंडियम का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम के अंत में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की अतिरिक्त सचिव सरिता चौहान ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह के उपरांत पुरस्कार विजेताओं के साथ सामूहिक छायाचित्र लिया गया तथा स्मृति-चिन्ह वितरित किए गए।

उल्लेखनीय है कि ई—गवर्नेंस पर 29वां राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीईजी) का आयोजन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और राजस्थान सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। नैस्कॉम एवं एमएनआईटी, जयपुर कार्यक्रम के नॉलेज पार्टनर रहे।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026: 17 उत्कृष्ट नवाचार हुए सम्मानित

29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 प्रदान किए गए। सात श्रेणियों में कुल 17 उत्कृष्ट परियोजनाओं एवं पहलों को सम्मानित किया गया, जिनमें 10 स्वर्ण, 6 रजत तथा 1 जूरी पुरस्कार शामिल हैं।

स्वर्ण पुरस्कार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एग्री स्टैक, उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ई-जागृति, प्रयागराज मेला प्राधिकरण की महाकुंभ-2025, केरल विकास एवं नवाचार रणनीतिक परिषद (K-DISC) की ब्लड बैग ट्रेसिबिलिटी एवं नागरिक संपर्क पोर्टल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा में एआई-सक्षम नैदानिक निर्णय सहायता प्रणाली, केरल उच्च न्यायालय की जिला न्यायालय केस प्रबंधन प्रणाली (DCMS), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की आईसीएमआर-एमआईएनडीएस अध्ययन, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (ISRO), अहमदाबाद की खतरे की जानकारी एवं DNS फिल्टरिंग सेवा के लिए सुरक्षा उत्पाद, मध्य प्रदेश के शहरी विकास एवं आवास विभाग की ई-नगरपालिका में साइबर सुरक्षा व्यवस्था तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के सुदृढ़ डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम को प्रदान किए गए।

रजत पुरस्कार महाराष्ट्र के नंदुरबार जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग की ई-आरोग्य धमनी, पुणे 360, महाराष्ट्र के सांगली जिले की काडेपुर ग्राम पंचायत, पश्चिम त्रिपुरा की विजय नगर ग्राम पंचायत, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट, उज्जैन की त्रिनेत्र- एआई आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली तथा पंचायती राज मंत्रालय की पंचायत उन्नति सूचकांक– विकसित भारत के लिए डेटा संचालित शासन परियोजना को प्रदान किए गए। वहीं सर्वे ऑफ इंडिया को सीओआरएस नेटवर्क के माध्यम से वास्तविक समय में सटीक स्थिति निर्धारण सेवाओं के लिए जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार विजेताओं को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र तथा स्वर्ण पुरस्कार के लिए 10 लाख रुपये और रजत पुरस्कार के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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