जोधपुर की ओपन जेल में सात फेरे लेकर जिन्दगी के हमसफर बने हत्या के दो सजायाफ्ता कैदी

युगवार्ता    22-Jul-2026
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जोधपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। मंडोर स्थित ओपन जेल में आज प्रेम, विश्वास और नए जीवन की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी मूलाराम बाकायदा दूल्हा बनकर और सीमा दुल्हन के रूप में विवाह स्थल पहुंचे। दोनों ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली और सात फेरे लेकर हमेशा-हमेशा के लिए परिणय सूत्र में बंध गए।

खुली जेल परिसर में हुए इस अनूठे विवाह समारोह में कुल 21 बाराती उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से जेल प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस और जेल प्रशासन के लोगों ने इस शादी में न केवल एक गवाह की भूमिका निभाई, बल्कि दूल्हा और दुल्हन को आशीर्वाद देकर एक खुशहाल भविष्य की कामना भी की। खुली जेल के माहौल में हुए इस सादगीपूर्ण और पवित्र आयोजन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

मूलाराम नागौर के अडसिंगा का निवासी है। परिवार खेती करता था। उसके पिता का पड़ोसी से विवाद था। वर्ष 2017 में मूलाराम पड़ोसी युवक को बाइक पर बिठाकर ले गया था, लेकिन बाद में उसकी लाश टांके से मिली थी। इसके लिए कोर्ट ने मूलाराम को हत्या का दोषी माना था। अगस्त 2023 अगस्त में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। दो साल से वह मंडोर में ओपन और जेल कैंप में सरपंच पद पर काम कर रहा है।

सीमा घड़से मूलत: महाराष्ट्र में मुंबई के पास की है। वर्ष 2016 में उसकी शादी जोधपुर के घंटाघर निवासी कौशलराज अरोड़ा से हुई थी। मर्जी के खिलाफ हुई इस सीमा इस शादी से खुश नहीं थी। शादी के 2 महीने बाद ही सीमा ने सोते हुए पति की दोनों हाथ की नसें धारदार वस्तु से काट दी थीं। इससे कौशलराज की मौत हो गई थी। कोर्ट ने वर्ष 2019 में सीमा को उम्रकैद की सजा दी थी।

दोनों ही बंदी हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अच्छे आचरण के कारण राजस्थान उच्च न्यायालय ने दोनों को मंडोर की खुली जेल में स्थानांतरित किया था। यहां रहने के दौरान वे एक-दूसरे के संपर्क में आए और उन्होंने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया। विवाह के लिए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। राजस्थान हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और बंदियों के पुनर्वास व मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को मंजूरी दी और आवश्यक पैरोल प्रदान करने के निर्देश दिए थे।

हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक और अनूठे आदेश के बाद जेल प्रशासन ने शादी की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की थी। ओपन जेल प्रभारी हापू राम की निगरानी में सुरक्षा एवं आयोजन संबंधी सभी प्रबंध किए गए, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की सतत मॉनिटरिंग की। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था केवल दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के पुनर्वास, सामाजिक पुनसर््थापन और उन्हें सम्मानपूर्वक नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।डेढ़ साल से रह रहे हैं ओपन जेल में

पति की हत्या के आरोप में साल 2019 से सजा काट रही सीमा के परिवार से महाराष्ट्र से कोई भी इस शादी में शामिल होने नहीं आ पाया। ऐसे में जेल में बनी सीमा की एक सहेली के पिता जसाणियां की ढाणी रावरा, फलोदी निवासी राधाकिशन वागेला ने पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान किया। इस शादी के लिए कोर्ट के निर्देशानुसार सीमित संख्यां में मेहमानों को शामिल होने की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने नागौर निवासी मूलाराम की अस्थाई सजा निलंबन याचिका का निस्तारण करते इस शादी का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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