
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, महामारी की तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य, टीबी अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति
चंडीगढ़, 23 जुलाई (हि.स.)। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता-2026 के तहत चंडीगढ़ में आयोजित 16वें ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्री स्तरीय बैठक गुरुवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान साझा स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के विषय ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ के तहत आयोजित इस बैठक ने सदस्य देशों को स्वास्थ्य क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम 16वें ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्री स्तरीय घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाना रहा। घोषणापत्र के माध्यम से ब्रिक्स देशों ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया, डिजिटल स्वास्थ्य, नियामक सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों से निपटने, मानसिक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली तथा पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
घोषणापत्र में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं, टीकों, जांच सुविधाओं तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकियों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक के दौरान सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने अपने-अपने देशों की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, महामारी से निपटने की क्षमता बढ़ाने, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे के विकास तथा अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रतिनिधिमंडलों ने संक्रामक एवं गैर-संक्रामक बीमारियों से मुकाबला करने, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, औषधि नियमन को मजबूत करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों को भी साझा किया।
ब्रिक्स देशों ने स्वास्थ्य ट्रैक को आगे बढ़ाने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना की। सदस्य देशों ने कहा कि भारत की ओर से निर्धारित नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्र वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देंगे।
ब्रिक्स देशों ने टीबी अनुसंधान नेटवर्क को और मजबूत करने का समर्थन किया। इसका उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान साझा करने के माध्यम से तपेदिक उन्मूलन के प्रयासों में तेजी लाना है।
बैठक में चिकित्सा उत्पाद नियामक प्राधिकरणों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई, ताकि नियामक प्रणालियों में तालमेल स्थापित किया जा सके और सुरक्षित, प्रभावी तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
सदस्य देशों ने संक्रामक रोगों की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली से संबंधित विशेष उप-कार्य समूह के गठन का समर्थन किया। इसके माध्यम से रोग निगरानी, सूचना के आदान-प्रदान, सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत किया जाएगा।
बैठक में निरंतर देखभाल के लिए डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और दूरदराज तथा वंचित क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विचार किया गया।
सदस्य देशों ने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के माध्यम से आपस में जुड़ी हुई स्वास्थ्य प्रणालियां विकसित करने, बेहतर समन्वय स्थापित करने और डिजिटल स्वास्थ्य से जुड़ी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने का समर्थन किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जन-केंद्रित नीतियों, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच और बेहतर सेवा वितरण के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
ब्रिक्स प्रशिक्षण केंद्र नेटवर्क बनाने का भी समर्थन किया गया, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने, प्रशिक्षण और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि बैठक में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक उपचार प्रणालियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि सभी सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए एक विशेष कार्य समूह गठित करने पर सहमति व्यक्त की है।
जाधव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। आज आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को दुनिया के अनेक देशों में स्वीकार किया जा रहा है। प्रस्तावित कार्य समूह ब्रिक्स देशों में पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने और इसके वैज्ञानिक आधार को और मजबूत करने में मदद करेगा।
मंत्रियों ने सामाजिक परिस्थितियों से उत्पन्न बीमारियों से निपटने के लिए ब्रिक्स परिचालन ढांचे का समर्थन किया। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य असमानताओं को कम करना, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को आगे बढ़ाना और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / GURSHARAN SINGH