तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की शोक यात्रा में जनसैलाब, इराक के नजफ और कर्बला में भी दी जाएगी श्रद्धांजलि

युगवार्ता    06-Jul-2026
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तेहरान में आज दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए निकाली गई शोक यात्रा (जुलूस) में जनसैलाब उमड़ पड़ा है। हुसैन स्क्वायर से शुरू यह जुलूस आजादी आजादी स्क्वायर में खत्म होगा। अधिकारियों का अनुमान है कि आजादी स्क्वायर पहुंचने में करीब 12 घंटे का समय लगेगा। फोटो - इरना


तेहरान में आज दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए निकाली गई शोक यात्रा (जुलूस) में जनसैलाब उमड़ पड़ा है। हुसैन स्क्वायर से शुरू यह जुलूस आजादी आजादी स्क्वायर में खत्म होगा। अधिकारियों का अनुमान है कि आजादी स्क्वायर पहुंचने में करीब 12 घंटे का समय लगेगा। फोटो - इरना


तेहरान (ईरान), 06 जुलाई (हि.स.)। ईरान की राजधानी तेहरान में आज देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई को अंतिम विदाई दी जा रही है। छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम की शुक्रवार से शुरू हुईं रस्मों के अंतर्गत आज उनकी शोक यात्रा (जुलूस) में शामिल होने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा है। शोक यात्रा का मार्ग 10 किलोमीटर (6.2) किलोमीटर लंबा है। यह जुलूस पूर्वी तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर से शुरू हुआ है। इसका समापन पश्चिमी हिस्से में स्थित आजादी स्क्वायर पर होगा। दिवंगत नेता को इराक के नजफ और कर्बला में भी श्रद्धांजलि दी जाएगी।

भीड़ की भारी तादाद और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सुबह से शुरू जुलूस को पूरा होने में लगभग 10 से 12 घंटे का समय लगेगा। आम दिनों में कार या टैक्सी से हुसैन स्क्वायर से आजादी स्क्वायर पहुंचने में अधिकतम समय लगभग 12 से 45 मिनट लगता है। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को पवित्र शहर कोम, इराक के शिया धर्मस्थलों और फिर अंतिम संस्कार के लिए उनके जन्मस्थान मशहद ले जाया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि लाखों लोग सड़कों पर हैं। जुलूस में शामिल कई लोग लाल और सफेद रंग का झंडा लहरा रहे हैं। शिया मुस्लिम परंपरा में यह झंडा शहादत और बदले का प्रतीक माना जाता है।

ईरानी संवाद समिति इरना, अखबार तेहरान टाइम्स, न्यूज चैनल अल जजीरा और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इस झंडे पर फारसी शब्द या हुसैन लिखा है। यह शब्द सातवीं सदी में इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है। इस्लामिक क्रांति के शहीद नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की विदाई और अंतिम संस्कार समारोह की आयोजन समिति के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल हसन हसनजादेह का कहना है कि जुलूस के 10 से 12 घंटे तक चलने की उम्मीद है।

हसनजादेह ने पूर्वी तेहरान में शोक मनाने के लिए एकत्र हुए लोगों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ की वजह से ताबूत ले जाने वाली गाड़ी बहुत धीमी रफ्तार से चल रही है। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई का अंतिम संस्कार जुलूस उनके परिवार के सदस्यों के साथ शुरू हुआ। अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य रस्में मंगलवार को कोम में, बुधवार को नजफ और कर्बला में और गुरुवार को मशहद में होनी हैं। गुरुवार को मशहद में शहीद नेता को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस अवसर पर कहा कि इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई ने सभी को सिखाया कि देश की सबसे बड़ी संपत्ति उसके लोग और उनकी एकता है। उन्होंने कहा कि उनकी शोक यात्रा में शामिल जनसमूह इसका प्रतीक है। इससे पहले रविवार को राजधानी तेहरान के इमाम खुमैनी मोसाला में ईरान और दूसरे देशों से आए लोगों ने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। भीड़ बढ़ने पर विशाल परिसर के सभी द्वार बंद कर दिए गए। ईरान की सबसे वरिष्ठ धार्मिक हस्तियों में से एक अयातुल्ला जाफर सोभानी ने तेहरान के इमाम खुमैनी मोसाला में प्रार्थना का नेतृत्व किया। सबसे पहले शहीद नेता के लिए अंतिम संस्कार की प्रार्थना की गई। इसके बाद अयातुल्ला खामेनेई के परिवार के उन चार सदस्यों के लिए प्रार्थना की गई जो 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में मारे गए थे।

दिवंगत नेता खामेनेई के दामाद डॉ. मेस्बाह अल-होदा बघेरी कानी, उनकी सबसे बड़ी बेटी सैयदा बुशरा हुसैनी खामेनेई, उनकी 14 महीने की पोती जहरा मोहम्मदी गोलपायगानी और उनकी बहू जहरा हद्दाद आदेल की इस हमले में मौत हो गई थी। जहरा हद्दाह आदेल इस्लामिक क्रांति के मौजूदा नेता मोजतबा खामेनेई की पत्नी हैं। दिवंगत नेता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ ईरान के वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों ने भी प्रार्थना में भाग लिया। प्रार्थना के दौरान अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मसूद, मेसम और मुस्तफा मौजूद रहे। उनके उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई इस दौरान नजर नहीं आए।

वर्ष 1939 में ईरान के मशहद में जन्मे खामेनेई कम उम्र में ही शिया मुस्लिम धर्मगुरु बन गए थे। 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले वे एक एक्टिविस्ट के तौर पर सक्रिय थे। उन्होंने ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में मदद की और इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा। नए इस्लामिक शासन के विरोधियों के निशाने पर भी वे रहे और 1981 में हुए हमले में बाल-बाल बचे, हालांकि इस हमले में उनका दाहिना हाथ बेकार हो गया। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रपति चुना गया। वे ईरान के पिछले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी और शिष्य थे। खुमैनी ने ही शाह को सत्ता से हटाने के संघर्ष का नेतृत्व किया था और इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की थी। 1989 में खुमैनी के निधन के कुछ ही हफ्तों के भीतर खामेनेई उनके उत्तराधिकारी बन गए।

इराक के 'नेशनल विजडम मूवमेंट' के प्रमुख सैयद अम्मार अल-हकीम का कहना है कि इराक में शहीद नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के लिए श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी। ये सभाएं उन्हें ईरान के नेता के तौर पर नहीं, बल्कि मुस्लिम दुनिया के प्रमुख धार्मिक गुरुओं में से एक के तौर पर आयोजित की जाएंगी। अल-हकीम ने कहा कि इराक बुधवार को नजफ और कर्बला के पवित्र शहरों में इन कार्यक्रमों की तैयारी कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

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