सिक्का गांव के एक परिवार के छठे सदस्य की मौत, सातवां इलाजरत

युगवार्ता    08-Jul-2026
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लाखो देवी


-रिम्स में महिला ने तोड़ा दम,सातवां सदस्य अब भी जिंदगी की लड़ रहा जंग

पलामू, 08 जुलाई (हि.स.)। पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव के एक परिवार की महिला मुखिया लाखो देवी (पति स्व. कुलदीप मेहता) की मंगलवार की रात रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस परिवार में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, जबकि परिवार का एक अन्य सदस्य सुनील कुमार मेहता अब भी रिम्स में भर्ती है और चिकित्सकीय निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक हुई सभी मौतों का कारण प्रारंभिक जांच में ड्रॉप्सी बीमारी माना गया है। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए सभी मृतकों की विसरा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच और रांची स्थित फूड टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट में सरसों के तेल में आर्जीमोन (कटैला/पीला धतूरा) के बीजों की मिलावट की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी दूषित तेल के सेवन से परिवार के सदस्य ड्रॉप्सी की चपेट में आए।

इस त्रासदी की शुरुआत 19 जून को परिवार के मुखिया कुलदीप मेहता की मौत से हुई। इसके अगले दिन 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी का निधन हो गया। 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी की भी मौत हो गई। इसके बाद 28 जून को बहू श्वेता ने दम तोड़ दिया। कुछ दिन बाद बेटे नकुल मेहता की रिम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई और अब मंगलवार देर रात लाखो देवी के निधन के साथ एक ही परिवार के छह सदस्य काल के गाल में समा चुके हैं।

परिवार का बेटा सुनील कुमार मेहता अभी भी रिम्स में उपचाराधीन है। वहीं दूसरे बेटे अनुज कुमार की जान इसलिए बच गई क्योंकि वह मजदूरी के सिलसिले में लंबे समय से घर से बाहर था और उसने कथित रूप से दूषित सरसों के तेल का सेवन नहीं किया था। परिवार का एक छोटा पोता भी सुरक्षित है, क्योंकि वह अपनी नानी के घर रह रहा था।

चिकित्सकों के अनुसार, सभी मरीजों में शरीर में सूजन आने के बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ती गई, जो ड्रॉप्सी बीमारी का प्रमुख लक्षण है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था की थी, लेकिन कई मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी।

पाटन के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार ने बुधवार को बताया कि लाखो देवी की मौत की सूचना विभाग को मिल चुकी है। स्वास्थ्य विभाग पूरे गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। पहले कराए गए व्यापक स्वास्थ्य सर्वे में इस परिवार के अलावा कोई अन्य व्यक्ति प्रभावित नहीं मिला था। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर गांव में दोबारा घर-घर सर्वे कराया जाएगा, ताकि किसी अन्य संभावित मरीज की समय रहते पहचान की जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि आर्जीमोन, जिसे स्थानीय भाषा में कटैला या पीला धतूरा कहा जाता है, पलामू क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उगने वाला कांटेदार खर-पतवार है। आशंका है कि सरसों की कटाई के दौरान इसके बीज फसल में मिल गए और उसी से तैयार तेल के सेवन के कारण परिवार के सदस्य बीमार पड़ गए। जांच के लिए भेजे गए अन्य खाद्य पदार्थों में किसी प्रकार की मिलावट नहीं पाई गई है।

वर्ष 2011 के बाद देश में ड्रॉप्सी का यह पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। एक ही परिवार में लगातार छह मौतों ने स्वास्थ्य विभाग के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें विसरा जांच की अंतिम रिपोर्ट और रिम्स में भर्ती सुनील कुमार मेहता के स्वास्थ्य पर टिकी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप कुमार

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