
एस. एस. राजामौली की ऐतिहासिक फिल्म 'बाहुबली: द बिगिनिंग' को रिलीज हुए ग्यारह वर्ष पूरे हो गए हैं। वर्ष 2015 में आई इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित किए बल्कि भव्य प्रस्तुति, शानदार दृश्य प्रभावों और दमदार कहानी के जरिए भारतीय फिल्म निर्माण के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। फिल्म में प्रभास द्वारा निभाए गए अमरेंद्र बाहुबली और महेंद्र बाहुबली के किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
फिल्म की सफलता में प्रभास के अभिनय और उनके प्रभावशाली संवादों का बड़ा योगदान रहा। क्या है मृत्यु? रणभूमि में शत्रु से भयभीत होकर जीवित रहना ही मृत्यु है, देवी मां की प्यास बुझाने के लिए एक निर्बल की बलि क्यों? मेरा उमड़ता हुआ रक्त समर्पित है और सर कटने के बाद भी जो शत्रु की छाती में डर पैदा करे, वही योद्धा है जैसे संवाद आज भी प्रशंसकों की जुबान पर हैं। वहीं अवंतिका के साथ उनके भावनात्मक और रोमांटिक संवादों ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी।
ग्यारह वर्ष बाद भी 'बाहुबली: द बिगिनिंग' भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म ने प्रभास को पैन-इंडिया सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया और उनकी लोकप्रियता को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। आने वाले समय में प्रभास 'स्पिरिट', 'फौजी', 'कल्कि 2898 एडी पार्ट 2' और 'सालार पार्ट 2: शौर्यांग पर्वम' जैसी बड़ी फिल्मों में नजर आएंगे। 'बाहुबली' की विरासत आज भी दर्शकों के बीच उतनी ही मजबूत बनी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे