भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई गति: रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी सहित 18 प्रमुख समझौते

युगवार्ता    09-Jul-2026
Total Views |
प्रधानमंत्री मोदी और आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री वार्ता करते हुए


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत गुरुवार को रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा विशेषकर नाभिकीय ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, खनन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा सांस्कृतिक विरासत सहित विभिन्न क्षेत्रों में 18 महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों को अपनाया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मेलबर्न में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ सार्थक वार्ता की। वार्ता के नतीजों के तहत अब आस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियन की सप्लाई होगी। आस्ट्रेलिया तीन प्राचीन कलाकृतियां भारत को लौटाएगा। रक्षा क्षेत्र में सहयोग में दोनों देशों ने कई नए विषयों को शामिल किया है।

दोनों नेताओं ने वार्ता के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी में हुई मजबूत प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में बताया, “हमने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते यानी सीईसीए पर तेजी से काम करने का निर्णय लिया है।”

प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में दोनों देशों की वैश्विक मुद्दों पर राय भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मानते हैं कि आतंकवाद केवल किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा और संकल्प अटूट है।

उन्होंने कहा कि हमारा यह भी मानना है कि विश्व के अनेक भागों में चल रहे तनावों और युद्धों का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। पूरे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देश मिलकर शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई।

भारतीय कलाकृतियों एवं धरोहरों की वापसी के क्रम में कुछ और नाम जुड़े। आस्ट्रेलिया तमिलनाडु की तीन प्राचीन कलाकृतियों को वापस करेगा। इसमें शिव के वाहन पवित्र बैल नंदी (11वीं से 12वीं शताब्दी की ग्रेनाइट), शुभ काली (भद्रकाली) के साथ त्रिशूल (11वीं शताब्दी, कांसे) एवं छह सिर वाले स्कंद (कार्तिकेय) (12वीं शताब्दी, बेसाल्ट) कलाकृति शामिल है।

दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौतों में संयुक्त रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग घोषणा का नवीनीकरण शामिल है। इसके तहत सैन्य अंतर-संचालन क्षमता, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद रोधी सहयोग, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप, ऊर्जा सुरक्षा पर संयुक्त वक्तव्य, भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु समझौते के प्रशासनिक प्रबंध को अंतिम रूप तथा साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी (पीएसीटीएस) पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलियाई मैरीटाइम बॉर्डर कमांड के बीच सहयोग बढ़ाने, वर्ष 2028-29 में ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज में भारतीय सैन्य प्रशिक्षक की नियुक्ति से जुड़े समझौते भी किए हैं।

शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान में खनन एवं खनन उपकरण उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय बेंगलुरु में कैंपस स्थापित करेगा। इसके अलावा विक्टोरिया विश्वविद्यालय गुड़गांव में अपना शिक्षा परिसर बनाएगा। व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, वैज्ञानिक अनुसंधान, भू-विज्ञान, पारंपरिक ज्ञान, फिल्म शिक्षा तथा नवाचार के क्षेत्र में भी कई समझौते किए गए। गांधीनगर में रूफटॉप सौर प्रशिक्षण अकादमी को आस्ट्रेलिया के सहयोग से संचालन में लाकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

Tags