
नोएडा, 09 जुलाई (हि.स.)। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और रामायण परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा 'रामायणी सम्मान-2026' का आयोजन आगामी 18 अगस्त को बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में किया जाएगा। यह आयोजन गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के पावन अवसर पर होगा।
यह जानकारी काउंसिल के ट्रस्टी एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. देवदत्त शर्मा ने आज दी। डॉ. शर्मा ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में रामायण परंपरा के संरक्षण, संवर्धन, अनुसंधान, साहित्य सृजन, कथावाचन, संगीत, सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों, शोधकर्ताओं, कथावाचकों, साहित्यकारों एवं अन्य विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।
वहीं काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य रामायण के व्यापक वाङ्मय और उसकी जीवंत परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करना, भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहकों का सम्मान करना तथा नई पीढ़ी को रामायण साहित्य, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का आधार है।
उन्होंने बताया कि सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। पात्र आवेदकों एवं नामांकित विभूतियों का मूल्यांकन उनके मौलिक योगदान, प्रभाव क्षेत्र, शोध एवं प्रकाशन, सामाजिक प्रभाव तथा रामायण परंपरा में योगदान जैसे निर्धारित मानकों के आधार पर 100 अंकों की प्रणाली से किया जाएगा। हितों के टकराव की स्थिति में संबंधित चयन समिति सदस्य स्वयं को उस मूल्यांकन प्रक्रिया से अलग रखेंगे। चयन समिति एवं मार्गदर्शक मंडल में संत, शिक्षाविद्, न्यायविद्, कथावाचक, साहित्यकार, पत्रकार, प्रशासनिक अधिकारी और सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किया गया है।
नामांकन प्रक्रिया 9 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। आवेदन ई-मेल, गूगल फॉर्म तथा ऑफलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद 24 से 29 जुलाई तक प्रारंभिक जांच, 30 जुलाई से 3 अगस्त तक विस्तृत मूल्यांकन, 4 और 5 अगस्त को अंतिम अनुमोदन तथा 6 अगस्त 2026 को चयनित सम्मानार्थियों की आधिकारिक घोषणा प्रस्तावित है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी