राष्ट्र प्रथम का मंत्र लेकर आगे बढ़ें युवा, विवेक स्मारक नई पीढ़ी के लिए बने प्रेरणा केंद्र : मोदी

युगवार्ता    01-Aug-2026
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को मैसूर में ‘विवेक स्मारक’ का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए


मैसूर, 01 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को मैसूर में श्री रामकृष्ण आश्रम परिसर में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र ‘विवेक स्मारक’ का उद्घाटन करते हुए युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक ऐसे युवाओं के निर्माण का केंद्र बनेगा, जिनके लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि हो और गरीब, वंचित तथा समाज की सेवा जीवन का लक्ष्य हो। उन्होंने कहा कि आज भारत की आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक उपलब्धियों के पीछे देश के युवाओं की शक्ति है और यही युवा विकसित भारत के निर्माण का आधार बनेंगे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत मैसूर की आराध्य देवी चामुंडेश्वरी को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही देश ने गुरु पूर्णिमा मनाई थी और उनके जीवन की यात्रा में रामकृष्ण मिशन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि जहां से उनकी यात्रा शुरू हुई और आज वह जिस स्थान पर हैं, उसमें रामकृष्ण मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि मैसूर भारत की प्राचीन सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, परंपराएं, दशहरा, राजमहल, संगीत और साहित्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि मैसूर ने अपनी इस विरासत को सहेजकर रखा है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद की स्मृतियां इसी गौरवशाली विरासत का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने उस ऐतिहासिक भवन का भी दौरा किया, जहां स्वामी विवेकानंद अपने प्रवास के दौरान ठहरे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि कुवेम्पु सहित अनेक विद्वानों का भी रामकृष्ण आश्रम से गहरा संबंध रहा है और विवेक स्मारक इस विरासत को नया विस्तार देगा।

मोदी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति एक दिन में महान नहीं बनता। महानता के लिए तप, साधना, संघर्ष और निरंतर आत्मसमर्पण की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि प्रसिद्धि मिलने के बाद तो दुनिया साथ खड़ी हो जाती है लेकिन तपस्या के समय किसी महान व्यक्तित्व को पहचानना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि करीब 130 वर्ष पहले जब युवा संन्यासी के रूप में स्वामी विवेकानंद मैसूर आए थे, तब उनकी प्रसिद्धि नहीं थी लेकिन उनके विचार उतने ही महान थे। उस समय मैसूर के तत्कालीन महाराजा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सहयोग दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका प्रवास के दौरान स्वामी विवेकानंद ने स्वयं अपने पत्र में महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के मूल संदेश को आत्मसात किया था। उनका मानना था कि वही व्यक्ति वास्तव में जीवित है, जो दूसरों के लिए जीता है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए मैसूर का रामकृष्ण आश्रम पिछले सौ वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और समाज सेवा के अनेक कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विवेक स्मारक साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश 'शिव ज्ञाने, जीव सेवा' आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि इस स्मारक के माध्यम से ऐसे युवाओं का निर्माण होना चाहिए जिनके लिए समाज और राष्ट्र का हित सर्वोपरि हो, गरीबों और वंचितों की सेवा जीवन का उद्देश्य हो तथा 'राष्ट्र प्रथम' उनका मूल मंत्र बने।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार मानते थे। गुलामी के दौर में भारतीय युवा अवसरों से वंचित था लेकिन आज वही युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और डिजिटल समाधान के क्षेत्र में अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन चुका है। भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इन सभी उपलब्धियों के पीछे देश के युवाओं की शक्ति है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में भारतीय युवाओं ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी नया इतिहास रचा है। पहली बार युवाओं द्वारा विकसित एक निजी कंपनी का रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है, मुद्रा योजना के माध्यम से नए उद्यम शुरू कर रहा है, स्टार्टअप क्रांति का नेतृत्व कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया जैसे अभियानों की सफलता का सबसे बड़ा आधार बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि युवाओं की क्षमता तभी राष्ट्र की शक्ति बनती है, जब उन्हें सही अवसर, सही दिशा और अपने देश में बड़े सपने देखने का विश्वास मिले। इसी उद्देश्य से पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक नए विश्वविद्यालय, लगभग 14 हजार नए कॉलेज, नौ नए आईआईएम, सात नए आईआईटी और 13 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या करीब 1.40 लाख तथा मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रही है। देशभर में 14 हजार से अधिक पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं तथा 10 हजार से अधिक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की गई हैं, ताकि बच्चों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित हो। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित कर रही है। अब बेटियां सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश लेकर देश की सेवा कर रही हैं तथा मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई मातृभाषा में भी उपलब्ध कराई जा रही है।

मोदी ने कहा कि खेल राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। खेलो इंडिया, यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने लाखों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है। आधुनिक खेल अवसंरचना और खेलो इंडिया केंद्रों के माध्यम से गांवों और छोटे शहरों से नई प्रतिभाएं उभर रही हैं, जिसका परिणाम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के बेहतर प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है।

प्रधानमंत्री ने मैसूर के लोगों को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान बनाए रखने के लिए बधाई दी और स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण का संकल्प दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने कन्नड़ भाषा और साहित्य को नई पीढ़ी से जोड़ने, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा 'वोकल फॉर लोकल' का संदेश देते हुए मैसूर के रेशम, चंदन और हस्तशिल्प जैसे भारतीय उत्पादों को उपहार के रूप में अपनाने की अपील की।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित विवेक स्मारक राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित नई पीढ़ी तैयार करने का सशक्त केंद्र बनेगा और विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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