नई दिल्ली, 10 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आरटीई अधिनियम के दायरे में आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य न्यूनतम योग्यता है। पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी योग्यता हासिल करनी होगी।
शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 के अपने फैसले में टीईटी को बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में शामिल माना था। अदालत ने पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा में टीईटी उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया था।
बाद में 29 मई 2026 को समीक्षा याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी योग्यता हासिल करने की समय सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। अदालत ने संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों से टीईटी का आयोजन नियमित रूप से अधिमानतः साल में दो बार करने का प्रयास करने को कहा, ताकि पात्र शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त अवसर मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त उन सेवारत शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा था। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत ने ऐसे शिक्षकों को टीईटी योग्यता हासिल किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी है।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे शिक्षक टीईटी योग्यता हासिल किए बिना पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है और शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तों तथा तैनाती से संबंधित मामले संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार