वॉशिंगटन, 11 अगस्त (हि.स.)। भारत-अमेरिका के मध्य व्यापार और टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बीच व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोनों देशों के बीच मतभेदों को सीधे बातचीत के जरिए सुलझा सकते हैं। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच अच्छे कामकाजी संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे को लेकर अंतिम फैसला दोनों नेता मिलकर करेंगे।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नवारो से रूस से भारत की तेल खरीद और प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ के बारे में सवाल किया गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ट्रंप और मोदी के बीच बेहतर संबंध हैं और दोनों इस मामले को आपस में सुलझा लेंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी संसद में रूस से ऊर्जा खरीद करने वाले देशों पर कड़े शुल्क लगाने से जुड़ा कानून चर्चा में है। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम से जुड़े इस प्रस्ताव के तहत कुछ परिस्थितियों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
नवारो ने भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर अपने पुराने लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत की रूसी तेल खरीद में तेजी आई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस से खरीदे गए तेल से जुड़े उत्पादों की बिक्री के जरिए भारत के व्यापार से रूस को लाभ पहुंचा।
हालांकि, बातचीत के दौरान नवारो ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई आंकड़ा पेश नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित मुद्दा अब सुलझ चुका है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस पहलू के समाधान की बात कर रहे थे।
दरअसल, अमेरिकी सीनेट ने पिछले सप्ताह लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026 को 86-11 मतों से मंजूरी दी थी। विधेयक में रूस के तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों तथा प्रतिबंधों से बचने में शामिल पांच प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
हालांकि, विधेयक में भारत को स्वतः टैरिफ लगाने वाले देशों की सूची में नामित नहीं किया गया है। ऐसे में भारत पर संभावित शुल्क का अंतिम स्वरूप और उसका असर आगे होने वाली भारत-अमेरिका वार्ता तथा अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा।
----------------------
हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय