वॉशिंगटन, 11 अगस्त (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंध अब कानूनी चुनौती के घेरे में आ गए हैं। चार अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों ने न्यूयॉर्क की एक अदालत में मुकदमा दायर कर इन प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि सरकार के इस कदम से युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के पीड़ितों के लिए न्याय की राह मुश्किल हो रही है।
याचिका दायर करने वाले संगठनों में ह्यूमन राइट्स वॉच भी शामिल है। उनका आरोप है कि आईसीसी से जुड़े न्यायाधीशों और अभियोजकों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज करने जैसे कदम अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में खास तौर पर अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया गया है।
संगठनों ने अदालत से प्रतिबंधों को निरस्त करने की मांग करते हुए इसे न्यायिक स्वतंत्रता और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा बताया है। उनके मुताबिक, इस तरह की पाबंदियां युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपियों को न्याय के कटघरे तक लाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को प्रभावित कर सकती हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन पाबंदियों का असर केवल संबंधित अधिकारियों पर नहीं पड़ता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता और पीड़ितों की न्याय तक पहुंच पर भी पड़ सकता है। अब अदालत को यह तय करना है कि अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के भीतर है या नहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय