
नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। केन्द्र सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए “एक हर्ब, एक स्टैंडर्ड” पहल को अगले तीन वर्षों के लिए आगे बढ़ाया है।
इसके तहत आयुष मंत्रालय की भारतीय चिकित्सा एवं होमियोपैथी भेषजसंहिता आयोग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी )ने अपने समझौता ज्ञापन को नवीनीकृत किया है।
सरकार का उद्देश्य है कि एक ही औषधीय पौधे के लिए अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों में एक समान वैज्ञानिक गुणवत्ता मानक तय किया जाए। इससे आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों की पहचान, शुद्धता और गुणवत्ता को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
पहले चरण में इस पहल के तहत 50 औषधीय पौधों के मोनोग्राफ तैयार किए गए थे। अब अगले तीन वर्षों में इस काम को और आगे बढ़ाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि समान और वैज्ञानिक मानकों से भारतीय पारंपरिक दवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, इससे भारतीय औषधीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वीकार्यता दिलाने में भी मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था से दवा कंपनियों, निर्यातकों और जांच प्रयोगशालाओं के लिए नियम अधिक स्पष्ट और आसान होने की उम्मीद है। साथ ही, यह भारत की समृद्ध औषधीय वनस्पति और पारंपरिक चिकित्सा विरासत को सुरक्षित रखने में भी मदद करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी