
उज्जैन (मध्य प्रदेश), 12 अगस्त (हि.स.)। श्रावण मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर आज तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और दिव्य शृंगार के साथ संपन्न हुई।
बुधवार तड़के करीब 2ः30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया। उनकी आज्ञा प्राप्त करने के बाद चांदी का द्वार खोला गया और गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद पुजारियों ने भगवान का शृंगार उतारकर विधि-विधान से पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की।
भगवान महाकाल का पहले पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक शृंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल राजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते नजर आए। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। पुष्पों और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
भस्म अर्पण की परंपरा के तहत प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती की इस परंपरा के बाद बाबा महाकाल के साकार स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए। भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल की दैनिक पूजा परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। बाबा महाकाल के दर्शन होते ही श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाने लगे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे