चमोली टनल हादसे में सात मजदूरों की मौत, तीन अब भी लापता, झारखंड के श्रमिकों को लेकर बढ़ी चिंता

युगवार्ता    14-Aug-2026
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फाइल फोटो मुख्यमंत्री


-झारखंड सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

रांची, 14 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टीआरटी टनल में गुरुवार शाम हुए हादसे के बाद झारखंड के श्रमिकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि खूंटी, गुमला समेत झारखंड के अन्य जिलों के कुछ श्रमिक इस परियोजना में काम कर रहे थे। हादसे के दौरान कुछ श्रमिकों के टनल में फंसे होने की सूचना है। हालांकि, झारखंड के कितने श्रमिक फंसे हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब सात बजे टनल के अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आ गया। इससे वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई श्रमिक अंदर फंस गए। हादसे में अब तक सात मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 मजदूरों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। तीन मजदूरों की तलाश अभी भी जारी है।

हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब 3.5 किलोमीटर लंबी टनल में लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर हादसा होने की जानकारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हादसे के समय टनल के भीतर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अंदर जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा सुरंग में भर गया।

रेस्क्यू टीमें मलबा हटाकर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने का लगातार प्रयास कर रही हैं। वहीं, झारखंड सरकार संबंधित श्रमिकों की स्थिति की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों तक सही सूचना पहुंचाने में लगी हुई है।

हादसे की जानकारी मिलने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की। धामी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि टनल में फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

हेमंत सोरेन ने निर्माणाधीन सुरंगों में बार-बार हो रहे हादसों और श्रमिकों के फंसने की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रकृति और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम बार-बार सामने आ रहे हैं। ऐसे हादसे पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन को लेकर सावधान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित चमोली की इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग राज्य सरकार के कंट्रोल रूम से संपर्क कर श्रमिकों से जुड़ी जानकारी साझा करें।

राज्य सरकार ने श्रमिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर : 1800-3456-526

व्हाट्सऐप हेल्पलाइन नंबर : 9470132591, 9431336472, 9431336427

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राज्य के हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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