ईओडब्ल्यू ने शुरू की सैफ अली खान के परिवार की 1,370 एकड़ जमीन मामले की जांच, मांगे मूल दस्तावेज

युगवार्ता    14-Aug-2026
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सैफ अली खान (इंटरनेट से ली गई तस्वीर)


भोपाल, 14 अगस्त (हि.स.)। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की पत्नी आफताब जहां बेगम की बेची गई संपत्तियों की जांच तेज कर दी है। इस जांच के दायरे में अभिनेता सैफ अली खान और उनका परिवार भी शामिल है। ईओडब्ल्यू ने करीब 1,370 एकड़ भूमि के संबंध में सैफ अली खान से मूल दस्तावेज मांगे हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय और ईओडब्ल्यू महानिदेशक को मिली शिकायत पर शुक्रवार को कार्रवाई शुरू की गई है। शिकायत में भोपाल की पूर्व नवाबी संपत्तियों के स्वामित्व, बिक्री और उन्हें ‘शत्रु संपत्ति’ के तौर पर दर्ज किए जाने से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच की मांग की गई है।

दरअसल ईओडब्ल्यू भोपाल ने समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया था। अमिताभ अग्निहोत्री ने अपने अधिवक्ता प्रशांत पांडे के साथ लिखित साक्ष्य और दस्तावेज सौंपे हैं। भोपाल के कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर क्षेत्रों की नवाबी संपत्तियों पर कानूनी विवाद है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच की मांग की गई थी।

इसके बाद पूरा नवाब परिवार जांच के दायरे में आया है। इसमें सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा अली खान और शर्मिला टैगोर के नाम हैं। शिकायती आवेदन में कहा गया है कि सैफ अली खान ने उच्च न्यायालय में 1,370 एकड़ जमीन को नवाब की व्यक्तिगत संपत्ति बताया था। जांच समिति से इन जमीनों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेटी के पाकिस्तान जाने से उनकी संपत्ति शत्रु संपत्ति घोषित हुई थी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि सैफ अली खान ने उच्च न्यायालय में करीब 1,370 एकड़ जमीन को नवाब की निजी संपत्ति बताया था। अब जांच समिति से इन जमीनों की वर्तमान स्थिति और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों को स्पष्ट करने की मांग की गई है। मामले में भोपाल के कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर समेत कई क्षेत्रों में स्थित नवाबी संपत्तियों का जिक्र किया गया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन संपत्तियों के स्वामित्व और खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच की जरूरत है। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नवाब परिवार की कौन-कौन सी संपत्तियां शत्रु संपत्ति के दायरे में आती हैं और उनका बाद में किस तरह इस्तेमाल या हस्तांतरण किया गया।

शिकायत के मुताबिक वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में करीब 655 एकड़ और बोरबन में लगभग 102 एकड़ जमीन दर्ज थी। आरोप है कि पाकिस्तानी नागरिकता से जुड़े तथ्यों को छिपाकर इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

शिकायत में बताया गया है कि 31 मई 1994 को बेहटा की करीब 30.55 एकड़ जमीन एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को 30.55 लाख रुपये में बेचे जाने का रिकॉर्ड है। इसमें 1.55 लाख रुपये चेक के जरिए भुगतान किए गए थे, जबकि बाकी 29 लाख रुपये चार किस्तों में देने का समझौता हुआ था।

ईओडब्ल्यू से शिकायत में कस्टोडियन विभाग, मुंबई और भोपाल कलेक्टर के निर्देशों के आधार पर हुई कार्रवाई की भी जांच की मांग की गई है। वर्ष 2021 और 2022 में नवाब परिवार की कुछ संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ के तौर पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा पटौदी परिवार से 29 अप्रैल 1949 को बीपी मेनन द्वारा हस्ताक्षरित नक्शे, 30 अप्रैल 1949 के मर्जर एग्रीमेंट और 1 जून 1949 से पहले तैयार की गई संपत्ति सूची की मूल प्रतियां भी मांगे जाने की बात सामने आई है।

शिकायत में पूर्व भोपाल रियासत के करीब 2,556 गांवों में फैली नवाब परिवार की जमीनों की भी विस्तृत जांच की मांग की गई है। पूर्व प्रमुख सचिव की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिकायत में कहा गया है कि मर्जर एग्रीमेंट में करीब 1,395 एकड़ जमीन दर्ज थी, जबकि नौ गांवों में 1,984.13 एकड़ अतिरिक्त भूमि नवाब परिवार के नाम दर्ज हो गई। इस अतिरिक्त भूमि की खरीद-बिक्री की जांच आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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