स्वतंत्रता दिवस पर लोकपाल अध्यक्ष ने तिरंगा फहराया, स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की प्रतिबद्धता दोहराई

युगवार्ता    15-Aug-2026
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लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकपाल परिसर में तिरंगा फहराते हुए।


लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकपाल परिसर में अन्य सदस्यों के साथ।


नई दिल्ली, 15 अगस्त (हि.स.)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय माणिकराव खानविलकर ने लोकपाल परिसर में तिरंगा फहराकर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के प्रति लोकपाल की प्रतिबद्धता दोहराते हुए संविधान, कानून के शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया।

लोकपाल कार्यालय के अनुसार, इस अवसर पर लोकपाल के सदस्य न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी, न्यायमूर्ति संजय यादव, सुशील चंद्र, न्यायमूर्ति ऋतु राज अवस्थी, पंकज कुमार और अजय तिर्की सहित वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति खानविलकर ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के उस विचार को याद किया, जिसमें उन्होंने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की थी जहां मन भय से मुक्त हो और सिर गर्व से ऊंचा रहे। उन्होंने नागरिकों से इस आदर्श को अपने विचारों और कार्यों में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता, असंख्य देशभक्तों के बलिदान और कड़े संघर्षों से हासिल हुई है। राष्ट्रीय ध्वज फहराना केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के गौरवशाली अतीत और स्वतंत्रता के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों की याद दिलाने वाला अवसर है।

लोकपाल अध्यक्ष ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक आजादी नहीं है बल्कि हर नागरिक को भूख, अन्याय, उत्पीड़न और असमानता से मुक्ति तथा सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना भी है।

उन्होंने कहा कि लोकपाल भारत स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध संस्था है। लोकपाल के पास लगातार बढ़ रही शिकायतों की संख्या को उन्होंने नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और संस्था में उनके विश्वास का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि लोकपाल संविधान, कानून के शासन, जवाबदेही, दक्षता, पारदर्शिता और सुगमता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा। उन्होंने संस्था को तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के माध्यम से अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाने पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने अधिकारियों से कहा कि लोकपाल के पास आने वाली प्रत्येक शिकायत को गंभीरता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर फाइल के पीछे एक नागरिक होता है, जो न्याय की उम्मीद लेकर संस्था तक पहुंचता है और संस्थागत फैसलों का उसके जीवन पर प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि लोकपाल का मूल उद्देश्य संविधान की सेवा करना, कानून के शासन को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक प्राधिकार का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाए।

कार्यक्रम के अंत में लोकपाल अध्यक्ष ने सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के समर्पण और पेशेवर योगदान के लिए आभार जताया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए सभी का धन्यवाद किया और 'जय हिंद' के उद्घोष के साथ संबोधन समाप्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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