चटगांव में 15 वकीलों की गिरफ्तारी पर जेएमबीएफ ने की निंदा, आतंकवाद विरोधी कानून के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

युगवार्ता    16-Aug-2026
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बांग्लादेश (फाइल फोटो )।


नई दिल्ली, 16 अगस्त (हि.स.)। फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिसमेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने बांग्लादेश के चटगांव में पांच महिलाओं समेत 15 वकीलों की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता जताते हुए निंदा की है। संगठन ने आरोप लगाया कि इन वकीलों को 15 अगस्त के अवसर पर आयोजित निजी प्रार्थना और स्मरण सभा में शामिल होने के बाद आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया। जेएमबीएफ ने इसे मौलिक अधिकारों, विधि के शासन और वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

संगठन के अनुसार, चटगांव जिला बार एसोसिएशन से जुड़े 15 वकील डबल मूरिंग थाना क्षेत्र के मानसुराबाद स्थित वापडा कॉलोनी में अपनी सहकर्मी अधिवक्ता उम्मे हबीबा के आवास पर एकत्र हुए थे। यहां 15 अगस्त के अवसर पर प्रार्थना और मिलाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पुलिस वहां पहुंची और वकीलों को हिरासत में लेकर चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस की खुफिया शाखा के कार्यालय ले गई।

जेएमबीएफ के मुताबिक गिरफ्तार किए गए वकीलों में इस्कंदर मिर्जा, संजय कांति नाथ, एस. एम. सलाउद्दीन, अहसान आबिद, सुल्तान महमूद जिदान, पार्थ प्रतिम नंदी, शुभ आइच, मशीयुर रहमान आबिर, जाकिर हुसैन, जीशु रॉय चौधरी, उम्मे हबीबा, कमेला खानम, आयशा हेवन, सुजला अंतरा और शर्मिन यास्मिन निशु शामिल हैं। संगठन का दावा है कि गिरफ्तार वकीलों को अवामी लीग समर्थक के रूप में जाना जाता है।

संगठन ने कहा कि गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद कई वरिष्ठ वकील खुफिया शाखा कार्यालय पहुंचे और हिरासत में लिए गए वकीलों से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जेएमबीएफ ने इसे कानूनी सहायता और उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार को लेकर अतिरिक्त चिंता का विषय बताया है।

पुलिस की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि कार्रवाई गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। इसके बाद सभी 15 वकीलों के खिलाफ बांग्लादेश के आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें अदालत में पेश किया गया।

जेएमबीएफ ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रार्थना, स्मरण, शोक व्यक्त करने या राजनीतिक विचार रखने जैसी गतिविधियों को अपने आप में आतंकवाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। संगठन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के हिंसा या वास्तविक आतंकवादी गतिविधि में शामिल होने का प्रमाण नहीं है, तो ऐसे मामले में आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल अनुपातहीन और गंभीर रूप से चिंताजनक है।

संगठन ने कहा कि बांग्लादेश का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता सहित कई मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। साथ ही, सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा-पत्र भी मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत से सुरक्षा तथा विचार, अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता को मान्यता देता है।

जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष, मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता शाहनूर इस्लाम ने कहा कि चटगांव में 15 वकीलों की गिरफ्तारी को अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह वकीलों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाए जाने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण स्मरण, प्रार्थना, राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति या किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव को अपने आप में आतंकवाद नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से शांतिपूर्ण गतिविधियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी और अन्य आपराधिक कानूनों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को तत्काल रोकने की मांग की।

जेएमबीएफ ने बांग्लादेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से सभी 15 गिरफ्तार वकीलों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने तथा केवल शांतिपूर्ण प्रार्थना एवं स्मरण कार्यक्रम में भाग लेने के आधार पर लगाए गए आरोप वापस लेने की मांग की है। संगठन ने वकीलों को तत्काल प्रभावी कानूनी सहायता और परिवार के सदस्यों से संपर्क की सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग की।

संगठन ने आतंकवाद विरोधी कानून के इस्तेमाल की समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कानूनों का प्रयोग मनमाने, भेदभावपूर्ण, अनुपातहीन या राजनीतिक उद्देश्यों से नहीं किया जाना चाहिए।

जेएमबीएफ ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, बांग्लादेश में स्थित कूटनीतिक मिशनों, अंतरराष्ट्रीय बार संगठनों, वकीलों के संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से मामले की निगरानी करने का आग्रह किया है। संगठन ने इन संस्थाओं से गिरफ्तार वकीलों की रिहाई और बांग्लादेश में वकीलों की स्वतंत्रता, अधिकार तथा गरिमा की रक्षा के लिए संबंधित अधिकारियों से अपील करने को कहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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