
कोलकाता, 17 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की ओर से सोमवार को कोलकाता में ‘कौशल मंथन’ क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कौशल विकास मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा उद्योग से जुड़े और रोजगारपरक कौशल विकास तंत्र को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने की। पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय सहित गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा के मंत्री भी इसमें शामिल हुए। गोवा, झारखंड तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।
जयंत चौधरी ने कहा कि देश के युवाओं में काफी क्षमता, महत्वाकांक्षा और परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उनकी क्षमता को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगारपरक बदलाव के माध्यम से उन्नत आईटीआई योजना (पीएम-सेतु) आईटीआई को उत्कृष्टता, नवाचार और आकांक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने राज्यों से पीएम-सेतु के तहत आईटीआई समूहों को प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के समूहों, उभरती प्रौद्योगिकियों और प्रस्तावित निवेशों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संबद्ध आईटीआई को मुख्य संस्थानों की प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षकों, करियर सेवाओं और नियोक्ता नेटवर्क तक नियमित पहुंच मिलनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कौशल पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई 2026 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए कौशल तैयारी कार्यक्रम के तहत 2.10 लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकन करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शिक्षा स्कूलों, आईटीआई और जिला स्तर के कौशल केंद्रों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि युवा केवल इसका इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि इसे समझने, अपनाने और नई संभावनाएं विकसित करने में भी सक्षम हों।
सम्मेलन में राज्यों ने आईटीआई के आधुनिकीकरण, जिला स्तर पर कौशल योजना, उद्योगों की भागीदारी, व्यावसायिक और सामान्य शिक्षा के एकीकरण, रोजगार क्षमता, उद्यमिता, समावेशन और श्रमिकों की अंतरराज्यीय आवाजाही से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान कौशल विकास कार्यक्रमों को राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने के साथ-साथ पाठ्यक्रम, मूल्यांकन, प्रमाणन और परिणामों के लिए राष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने पर भी सहमति बनी। प्रशिक्षुता को संस्थागत प्रशिक्षण और कार्यस्थल के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया गया।
मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने केंद्र और राज्यों के बीच एकीकृत क्रियान्वयन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य कौशल नीति, जिला कौशल विकास योजनाओं और राज्य कौशल विकास योजनाओं के आधार पर योजनाओं के लक्ष्य, बुनियादी ढांचे में निवेश, प्रशिक्षकों की तैनाती और उद्योगों के साथ साझेदारी तय की जानी चाहिए।
सम्मेलन में 2024-25 के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से तैयार की गई जिला और राज्य कौशल विकास योजनाओं को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। इनमें जिले और रोजगार की भूमिका के अनुसार कौशल की मांग, संस्थागत क्षमता, प्रशिक्षकों की उपलब्धता तथा स्थानीय आर्थिक जरूरतों को शामिल करने पर जोर दिया गया।
महानिदेशक, प्रशिक्षण महानिदेशालय दिलीप कुमार ने कहा कि पीएम-सेतु के तहत आईटीआई का बदलाव केवल बुनियादी ढांचे के उन्नयन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे संस्थान तैयार करना है जो उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को भविष्य के कौशल से लैस करें, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाएं और भारत को वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनाने में योगदान दें।
सम्मेलन के दौरान मध्य प्रदेश के 600 अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए एक अंतरराष्ट्रीय कौशल विकास कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। मध्य प्रदेश सरकार की मंजूरी से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के माध्यम से लागू होने वाले इस कार्यक्रम में जापान और जर्मनी में रोजगार के अवसरों के लिए विदेशी भाषा तथा संबंधित देशों में काम करने की तैयारी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें देखभाल सेवा, आतिथ्य, निर्माण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार पिल्लई और मध्य प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक सपन जैन के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस दौरान जयंत चौधरी सहित सम्मेलन में मौजूद अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए एक समान व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसमें कामगारों की पहचान, प्रशिक्षण, भाषा दक्षता, मूल्यांकन, नैतिक भर्ती और रोजगार मिलने के बाद सहायता को शामिल करने पर जोर दिया गया। विशेष रूप से देखभाल सेवा के क्षेत्र में विदेशों में रोजगार के अवसरों को तत्काल संभावनाओं के रूप में चिन्हित किया गया।
सम्मेलन के अंत में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने, एक-दूसरे के सफल अनुभवों से सीखने और कौशल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन तथा विद्यार्थियों के परिणामों की नियमित समीक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई गई। मंत्रालय ने राज्यों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने तथा प्रशिक्षण महानिदेशालय, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद और संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय जारी रखने का भरोसा दिया।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर