
मुंबई, 17 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को पुणे में कहा कि ‘राजनीति और सामाजिक मामलों में, सोच की कमी, सोच की विविधता से ज़्यादा बढ़ रही है, यह चिंता की बात है। अगर हम किसी की राय से सहमत नहीं भी हैं, तो भी हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन, विचारधारा और सिद्धांतों के बजाय हालात के हिसाब से अपनी राय बदलने की रफ़्तार बढ़ी है। ‘न लेफ्ट न राइट, हम मौकापरस्त हैं’ का ट्रेंड बढ़ रहा है। ऐसे समय में, समर्पित, सिद्धांतवादी लोग समाज के लिए रोशनी बनते हैं।’
पुणे जर्नलिस्ट्स फ़ाउंडेशन और पुणे श्रमिक जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की ओर से, सीनियर पत्रकार एस. के. कुलकर्णी को पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए आज केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने सम्मानित किया। इस मौके पर मेयर मंजुषा नागपुरे, पुणे जर्नलिस्ट्स फ़ाउंडेशन के प्रेसिडेंट राजेंद्र पाटिल, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट उमेश शेल्के, प्रतिष्ठान के वर्किंग ऑफिसर पांडुरंग सांडभोर और अन्य लोग मौजूद थे।
नितीन गडकरी ने कहा कि ‘जीत के कई बाप होते हैं, लेकिन हार का इल्ज़ाम किसी एक पर नहीं लगाया जा सकता। जब कामयाबी मिलती है, तो सब कुछ सही लगता है। उगते सूरज को सलाम करने का रिवाज समाज में है। लेकिन, शॉर्टकट से मिली कामयाबी ज़्यादा दिन नहीं टिकती। यह इतिहास में भी दर्ज नहीं होती। कभी हमारे काम की बुराई होती है, कभी तारीफ़ होती है। लेकिन, यह हमारा फर्ज़़ है कि हम वही करें जो हमारा दिल कहे, ईमानदारी से।’‘पत्रकारिता समाज तक ज्ञान पहुँचाने का एक ज़रिया है। पत्रकारों को समाज में बदलाव लाने का काम करना चाहिए। हालात बदले हैं, टेक्नोलॉजी आई है, मीडिया का नेचर बदला है लेकिन, समाज को कुछ समझाने और जनता को एजुकेट करने का पक्का इरादा पत्रकारिता में रहना चाहिए। इसके लिए एस. के. कुलकर्णी जैसे सीनियर लोगों की गाइडेंस बहुत ज़रूरी है,’ उन्होंने यह भी कहा।
बधाई का जवाब देते हुए, एस. के. कुलकर्णी ने बदलती पत्रकारिता पर कमेंट किया। उन्होंने कहा, ‘समय के साथ पत्रकारिता बदली है। पहले ख़बर पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। भोपाल गैस त्रासदी के बाद मैं वहाँ गया था। कोई भी सही जानकारी देने को तैयार नहीं था। मैं वहां एक साथी के साथ कब्रिस्तान गया और वहां से जानकारी लेने की कोशिश की। उस समय मुझे पता चला कि 2500 नागरिक मारे गए थे और मैंने इसकी रिपोर्ट की। उसके बाद सरकार ने भी आंकड़े मान लिए। आज के ज़माने में प्रिंट मीडिया तभी बचेगा जब अलग-अलग एक्सपेरिमेंट और अलग-अलग पॉलिसी अपनाई जाएंगी। इनोवेशन खोजने के बाद ही स्टाइल बनता है और न्यूज़वर्दीनेस बचती है। न्यूज़ पर पत्रकार की छाप रहनी चाहिए।' उमेश शेलके ने इंट्रोडक्शन दिया, जबकि हीरा सर्वाडे ने मॉडरेट किया। राजेंद्र पाटिल ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव