
नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) ने केंद्र सरकार से शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। पार्टी ने राम मंदिर चंदा चोरी के मामले को गांव स्तर तक उठाने का भी फैसला किया। बैठक में अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया। सीडब्ल्यूसी ने लोकसभा की 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक स्थिर रखने और इसी संख्या के भीतर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी दोहराई।
बुधवार को नई दिल्ली में करीब चार घंटे चली सीडब्ल्यूसी की बैठक में छात्र आंदोलन, पेपर लीक, अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ा कथित चंदा घोटाला, चीन के साथ सीमा विवाद, परिसीमन, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ और संगठन को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 88 सदस्य, स्थायी एवं विशेष आमंत्रित सदस्य तथा चार कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।
बैठक के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने महासचिव जयराम रमेश और मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ संवाददाताओं को बताया कि सीडब्ल्यूसी ने देशभर में छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष और बार-बार सामने आ रही प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर चिंता जताई। कांग्रेस ने मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की भूमिका की भी सराहना की।
वेणुगोपाल ने बताया कि राहुल गांधी के छात्र संपर्क कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ को देश के 800 बड़े और छोटे शहरों में आयोजित किया जाएगा। राहुल गांधी इनमें से कई कार्यक्रमों में स्वयं शामिल होंगे। सीडब्ल्यूसी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को छात्रों समेत सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर एक महीने के भीतर शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का खाका तैयार करने को कहा है। मुख्यमंत्रियों से शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए ठोस योजना पेश करने को कहा गया है।
अयोध्या के राम मंदिर में कथित ‘चंदा चोरी’ के मामले को लेकर कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन करने का फैसला किया है। वेणुगोपाल ने कहा कि यह मामला लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। सीडब्ल्यूसी ने प्रदेश कांग्रेस समितियों को इस मुद्दे को गांव स्तर तक ले जाने का निर्देश दिया है।
कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ पर भी गंभीर चिंता जताई। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार चीन के सामने स्थिति स्पष्ट करने में विफल रही है। उन्होंने 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किए जाने से इनकार किया गया था।
परिसीमन को लेकर कांग्रेस ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए लोकसभा सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक 543 पर स्थिर रखने की मांग की। पार्टी ने कहा कि इसी संख्या के भीतर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वेणुगोपाल ने इस संबंध में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया।
सीडब्ल्यूसी ने केरल में कांग्रेस को मिले जनादेश के लिए वहां की जनता का आभार जताया। बैठक में तमिलनाडु में चुनाव बाद बने गठबंधन की भी सराहना की गई। कांग्रेस ने दावा किया कि इस गठबंधन ने राज्य में भाजपा के कथित ‘प्रॉक्सी’ को जनादेश हासिल करने से रोक दिया।
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भी सीडब्ल्यूसी ने कड़ी आपत्ति जताई। वेणुगोपाल ने घटना को अस्वीकार्य बताते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया। सीडब्ल्यूसी ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री से माफी की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित शुद्धिकरण भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों की ऊंची जाति वाली मानसिकता को दर्शाता है। खरगे किसी एक जाति के नेता नहीं, बल्कि आम जनता के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष हैं।
बैठक में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई। संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया देशभर में जारी है और बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक इसे 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति अमेरिका और चीन के सामने बार-बार समर्पण करने वाली रही है। उन्होंने लद्दाख में भारत के गश्त के अधिकारों में कमी और अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाया।
वंदे मातरम् को लेकर पूछे गए सवाल पर जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस का रुख स्पष्ट है और पार्टी 1937 के सीडब्ल्यूसी प्रस्ताव का पालन करती है। उन्होंने कहा कि उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे और सीडब्ल्यूसी ने राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरों को गाने का प्रस्ताव स्वीकार किया था।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर