
इस्लामाबाद, 02 अगस्त (हि.स.)। पाकिस्तान के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम के कॉमनवेल्थ खेल 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनके दो प्रमुख पूर्व मार्गदर्शकों ने प्रशिक्षण की कमी और लापरवाही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। दोनों ने नदीम से दोबारा शीर्ष स्तर पर लौटने के लिए कड़ी मेहनत और नियमित प्रशिक्षण अपनाने की अपील की है।
पेरिस ओलंपिक 2024 में 92.97 मीटर का ऐतिहासिक थ्रो कर स्वर्ण पदक जीतने वाले अरशद ग्लासगो में अपनी लय नहीं पकड़ सके। उन्होंने 12 खिलाड़ियों की प्रतियोगिता में 77.41 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ नौवां स्थान हासिल किया। इससे पहले क्वालिफिकेशन में भी उनका प्रदर्शन साधारण रहा और वे 78.63 मीटर के थ्रो के साथ मुश्किल से फाइनल में पहुंचे थे।
इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत और यश वीर सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
अरशद के शुरुआती करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान एथलेटिक्स महासंघ के पूर्व अध्यक्ष अकरम साही ने कहा कि ओलंपिक स्वर्ण जीतने के बाद कुछ लोगों ने नदीम को उनसे दूर कर दिया। उनके अनुसार पिछले कुछ महीनों से पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होने के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे थे और ग्लासगो का परिणाम उसी का नतीजा है।
वहीं, एक अन्य पूर्व मार्गदर्शक ने कहा कि नदीम प्रशिक्षण को लेकर पहले जैसी गंभीरता नहीं दिखा सके। उनका कहना था कि दक्षिण अफ्रीकी कोच टर्सियस लीबेनबर्ग के मार्गदर्शन और दक्षिण अफ्रीका में विशेष प्रशिक्षण शिविरों ने उन्हें ओलंपिक चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल के समय में वैसी तैयारी नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ओलंपिक के बाद मिली आर्थिक सफलता के बाद नदीम व्यवसायिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त हो गए, जिससे उनके अभ्यास और प्रदर्शन पर असर पड़ा। साथ ही उन्होंने मौजूदा कोचिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
अकरम साही ने इस प्रतियोगिता में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे और भारत के यश वीर सिंह के उभरने की सराहना करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में भाला फेंक स्पर्धा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।
-----------------------
हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय