जुलाई माह में बायर की भूमिका में लौटे विदेशी निवेशक, स्टॉक मार्केट में किया 20,199 करोड़ का निवेश

युगवार्ता    02-Aug-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 02 अगस्त (हि.स.)। साल 2026 में ज्यादातर समय तक बिकवाल (सेलर) की भूमिका में बने रहने के बाद जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लिवाल (बायर) की भूमिका में बने रहे। जुलाई के पहले लगातार चार महीने यानी जून, मई, अप्रैल और मार्च में एफपीआई घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली कर अपना पैसा निकालने में लगे हुए थे। लेकिन, इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बिकवाली की तुलना में लिवाली अधिक की। इस महीने के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया।

एक जुलाई से 31 जुलाई के बीच के 23 कारोबारी दिन के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इक्विटी की लिवाली और बिकवाली मिला कर स्टॉक मार्केट में शुद्ध 20,199 करोड़ रुपये का निवेश किया। माना जा रहा है कि भारत में बेहतर होते घरेलू आर्थिक संकेतकों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती धारणा से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी का यह रुझान देखने को मिला है।

साल 2026 में जुलाई में हुई खरीदारी के पहले सिर्फ फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक खरीदार की भूमिका में नजर आए थे। फरवरी में एफपीआई ने कुल 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (सीएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार जुलाई के पहले जून के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 49,340 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

अगर साल की शुरुआत से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लिवाली और बिकवाली के आंकड़े की बात करें तो जनवरी के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने घरेलू शेयर बाजार में 35,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। फरवरी में एफपीआई ने बिकवाली की जगह लिवाली पर जोर दिया। इस महीने इन्होंने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया।

मार्च में एक बार फिर स्थिति बदल गई। इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने स्टॉक मार्केट में लगातार चौतरफा बिकवाली कर रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में भी एफपीआई की ओर से हो रही बिकवाली का सिलसिला जारी रहा। इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 60,847 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। इसके बाद मई के महीने में भी एफपीआई ने स्टॉक मार्केट में 32,963 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। जून में भी एफपीआई ने घरेलू शेयर बाजार से 49,340 करोड़ रुपये की निकासी की।

साफ है कि जनवरी से लेकर जुलाई तक के कारोबार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक अभी तक ज्यादातर समय बिकवाल की भूमिका में ही बने रहे हैं। इस तरह जनवरी से लेकर अभी तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लिवाली और बिकवाली मिलाकर घरेलू शेयर बाजार से 2,53,298 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी कर चुके हैं। जुलाई के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने पहले सप्ताह से ही घरेलू शेयर बाजार में इक्विटीज की खरीदारी शुरू कर इस बात का संकेत दे दिया था कि अगर हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, तो आगे भी उनकी खरीदारी जारी रह सकती है और जुलाई के अंत तक स्टॉक मार्केट में एफपीआई के शुद्ध निवेश का आंकड़ा और सुधर सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने और ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक अनसर्टेनिटी के बावजूद भारतीय स्टॉक मार्केट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की वापसी दरअसल भारत की वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और देश की आर्थिक स्थिति पर वैश्विक स्तर पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि घरेलू आर्थिक स्थिति में सुधार और रुपये की स्थिति ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजार में एफपीआई द्वारा की गई बिकवाली के कारण निवेश का एक बड़ा हिस्सा डायवर्ट होकर भारत की ओर आया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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