
- मुख्यमंत्री ने की केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा, दिए विस्थापित परिवारों को सभी सुविधाएं दिलाने के निर्देश
भोपाल, 21 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि विकास के साथ प्रभावित और विस्थापित परिवारों के हितों का पूरा ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार देर शाम खजुराहो में केन-बेतवा लिंक परियोजना के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। दरअसल, केन-बेतवा नदी जोड़ो एक राष्ट्रीय परियोजना है, लेकिन छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रभावित आदिवासियों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। इसके लिए लंबे समय सत्याग्रह और आंदोलन चल रहा है। दो दिन पहले ही आंदोलनकारियों ने नई दिल्ली पहुंचकर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी।
घर-घर पहुंचकर प्रभावित परिवारों की समस्याएं समझें अधिकारी
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध के बीच मुख्यमंत्री शुक्रवार को बुंदेलखंड क्षेत्र पहुंचे थे। उन्होंने खजुराहो में योजना की समीक्षा करते हुए पन्ना एवं छतरपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में अधिकारी घर-घर पहुंचकर परिवारों की वास्तविक स्थिति और समस्याओं को समझें। जनजातीय परिवारों की कठिनाइयों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका प्राथमिकता से निराकरण करें।
विस्थापित परिवारों को घर तक पहुंचाएं योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि विस्थापित परिवारों को शासन की पात्र योजनाओं का लाभ उनके घर तक पहुंचाया जाए। जहां परिवारों ने नए स्थान पर निवास बना लिया है, वहां स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन सहित जरूरी मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
रूँझ-मझगांव परियोजना के प्रभावितों को अतिरिक्त राशि का शीघ्र भुगतान
मुख्यमंत्री डॉ. ने पन्ना की रूँझ-मझगांव परियोजना में स्वीकृत अतिरिक्त राशि का प्रभावितों को शीघ्र भुगतान कराने के निर्देश दिए। जिन प्रभावितों के पास उम्र संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी आयु का निर्धारण मेडिकल परीक्षण के आधार पर करने को कहा।
परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग और विभागों में बेहतर समन्वय के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को परियोजना की उच्च प्राथमिकता के साथ नियमित मॉनिटरिंग करने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जन चौपाल और जागरूकता यात्राओं से लोगों को परियोजना के लाभ बताएं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जन चौपाल और जागरूकता यात्राओं के माध्यम से लोगों को परियोजना से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जाए। मैदानी स्तर पर सकारात्मक गतिविधियां आयोजित कर लोगों की आशंकाओं और समस्याओं का समाधान किया जाए।
8.11 लाख हेक्टेयर में बढ़ेगी सिंचाई क्षमता, 44 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा पेयजल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि परियोजना पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश में लगभग 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी प्रस्तावित है। बुंदेलखंड एवं मध्य भारत के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, विदिशा, रायसेन, शिवपुरी और दतिया जिलों के 1,382 गांवों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। छतरपुर और पन्ना जिले में कुल 5,039 परियोजना प्रभावित परिवार हैं। इनमें पन्ना जिले के 1,321 तथा छतरपुर जिले के 3,718 परिवार शामिल हैं। सभी प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन विशेष पैकेज का विकल्प चुना है।
सम्मानजनक पुनर्वास के साथ विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे प्रभावित परिवार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना केवल जल संसाधन विकास की योजना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड में आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम है। सरकार का प्रयास है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सम्मानजनक ढंग से हो और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। बैठक में प्रमुख सचिव जल संसाधन श्री संदीप यादव ने परियोजना की प्रगति का प्रस्तुतिकरण दिया।
केन-बेतवा परियोजना के क्रियान्वयन से देखने को मिलेगा सकारात्मक परिवर्तन : मुख्यमंत्रीखजुराहो में परियोजना की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि केन-बेतवा भारत की पहली लिंक परियोजना है। इसमें मध्य प्रदेश सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार भारत सरकार के साथ मिलकर क्रियान्वयन का कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2024 के दिसम्बर माह में इसकी आधारशिला रखी गई। वर्ष 2030 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना से व्यापक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। यह परियोजना क्षेत्र के विकास की दृष्टि से चमत्कारिक परिणाम सामने लाएगी। क्षेत्र का परिदृश्य बदल जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से संपूर्ण बुंदेलखंड सहित मध्यभारत के जिले भी लाभान्वित होंगे। रायसेन और विदिशा जिले के क्षेत्र भी परियोजना से सिंचित होंगे। सिंचाई ही नहीं पेयजल और ऊर्जा के क्षेत्र में भी परियोजना लाभ प्रदान करेगी। कुल 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई होगी। कुल 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। लगभग 44 लाख लोगों को 60 एमसीएम पेयजल प्राप्त होगा। इस परियोजना के लिए पन्ना, छतरपुर, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी जिलों की 4 लाख 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। परियोजना से लाभान्वित ग्रामों की संख्या 1382 रहेगी। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र के अलावा अन्य कई जिले जैसे - शिवपुरी, दतिया, रायसेन और विदिशा भी लाभान्वित होंगे। सागर जिले में परियोजना के अंतर्गत बीना काम्प्लेक्स से 90 हजार हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने समीक्षा बैठक में क्षेत्र के विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से चर्चा की है। परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें मुआवजा देने के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यों की प्रगति उत्साहजनक है। मध्यप्रदेश सरकार और भारत सरकार के सहयोग से जनता को आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर