सच्ची संवेदना से ही कालजयी कथा का सृजन संभव है : गजेन्द्र सिंह शेखावत

युगवार्ता    25-Aug-2026
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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को कहा कि जब साहित्य तिथियों के बंधन से मुक्त होकर मन को पढ़ता है, तब सच्ची संवेदना और 'कालजयी कथा' का सृजन होता है।

केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने यह बात आज दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में एक पुस्तक 'कहो कालिदास' के लोकार्पण के दौरान कही। इस पुस्तक के लेखक युगल जोशी हैं और मंजुल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई। इस दौरान पुस्तक परिचर्चा भी आयोजित की गई।

मुख्य अतिथि के रूप में शेखावत ने कहा, साहित्य यह जानने का प्रयास करता है कि उस समय मनुष्य के भीतर क्या घटित हुआ था।

कालिदास के जीवन के अनसुलझे पहलुओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास ने महाकवि की कृतियों को तो सहेज कर रखा लेकिन उनके जीवन को रहस्य के आवरण में छोड़ दिया। पुस्तक का शीर्षक ‘कहो कालिदास’ कोई आदेश नहीं, बल्कि वर्तमान समय का महाकवि को दिया गया एक आत्मीय आमंत्रण है। यह कृति कालिदास के किशोर मन, उनके प्रेम, विरह की वेदना, राजदरबार के द्वंद्व और उस सृजन को समझने का प्रयास करती है जिसने एक साधारण जीवन को अमर बना दिया।

कालिदास की कृतियों में मौजूद स्त्री चेतना का जिक्र करते हुए कहा कि शकुंतला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं बल्कि स्मृति और गरिमा का प्रतीक हैं। पार्वती संकल्प, कठोर तप और चयन की स्वाधीनता का प्रतिनिधित्व करती हैं। उर्वशी और मालविका प्रेम की अलौकिकता, कला और राजकीय मर्यादा के बीच स्त्री की सशक्त उपस्थिति को दर्शाती हैं।

आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि 'कहो कालिदास' पुस्तक में केवल सिर्फ शब्द नहीं हैं उसमें इतिहास का वक्त भी है और उसकी आवाजें भी हैं जो समय की चुप्पी को तोड़ती हैं। कालिदास केवल भारतीय कवि नहीं हैं बल्कि वैश्विक उनकी मान्यता है। कालिदास ने जो साहित्य रचा वह हर काल हर देश हर मनुष्य हर समाज के लिए है।

उन्होंने कहा कि लेखक ने कालिदास के पूरे संदर्भ को एक रचनात्मक रूपांतरण के रूप में प्रस्तुत किया है और वो रचनात्मक रूपांतरण इस तरह से है कि आज का युवा अपने सपनों को पंख दे। ऊंची उड़ान पंख की शक्ति से संभव होती है और 'कहो कालिदास' पुस्तक में वो पंख अगर कोई खोजे तो मिलेगा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में नीति आयोग की सदस्य डॉ. जोराम आनिया ने कहा कि कवि केवल उत्तरों से नहीं, प्रश्नों अनुभवों असफलताओं प्रेम विरह प्रकृति और आत्म-संघर्ष से बनता है।

उन्होंने कहा कि इतिहास जहां मौन है, वहां साहित्य बोलता है। जहां तथ्य समाप्त होता है, वहां कल्पना आरंभ होती है। जहां उत्तर समाप्त होते हैं, वहां प्रश्न जन्म लेते हैं।

लेखक युगल जोशी ने कहा कि साहित्यिक दृष्टिकोण कालिदास को मात्र लोककथाओं का पात्र मानने की अपेक्षा सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की कृपा से युक्त एक प्रबुद्ध एवं युगद्रष्टा कवि के रूप में स्थापित करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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