मप्र से समृद्ध गांव की राष्ट्रीय प्रयोगशाला का शुभारंभ, बुधनी और खातेगांव से ग्रामीण विकास के नए मॉडल की शुरुआत

युगवार्ता    25-Aug-2026
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान


- गरीबी-मुक्त, रोजगारयुक्त और सुविधासंपन्न गांवों की दिशा में केंद्र की बड़ी पहल

भोपाल, 25 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश एक बार फिर देश के ग्रामीण विकास के लिए प्रयोगशाला की भूमिका में दिखाई दे रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में ‘मिशन समृद्ध गांव’ योजना का शुभारंभ करते हुए मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी और देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक को इस महत्वाकांक्षी पहल के पायलट मॉडल के लिए चुना है। लक्ष्य ऐसे समग्र ग्रामीण मॉडल तैयार करना है, जहां हर परिवार के पास रोजगार या आजीविका का अवसर हो, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों और आर्थिक मजबूरी के कारण पलायन की आवश्यकता न पड़े।

बुधनी और खातेगांव बनेंगे पायलट मॉडल

‘मिशन समृद्ध गांव’ के तहत मध्य प्रदेश के इन दोनों ब्लॉकों में परिवार, ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर तक एकीकृत विकास की रूपरेखा तैयार की जाएगी। प्रत्येक परिवार की जरूरत और पात्रता के आधार पर उसे केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और ग्रामीण सुविधाओं को अलग-अलग योजनाओं के रूप में देखने के बजाय एक साझा विकास प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास होगा।

अब राज्य के लिए यह चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां विकसित होने वाला मॉडल बाद में देश के अन्य हिस्सों में दोहराया जाना प्रस्तावित है। इसका अर्थ यह है कि बुधनी और खातेगांव में होने वाले प्रयोगों से मिलने वाले अनुभव ग्रामीण विकास की राष्ट्रीय योजना को दिशा देंगे।

योजनाओं का अभिसरण बनेगा विकास का आधार

मिशन की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न सरकारी योजनाओं का अभिसरण है। कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित योजनाओं के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी इसके दायरे में रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी परिवार को एक योजना का लाभ तो मिले, लेकिन उसकी दूसरी मूलभूत जरूरतें अधूरी न रह जाएँ।

इस संबंध में केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना ग्रामीण विकास का प्रयोगात्मक मॉडल है। उनके अनुसार, यदि सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू कर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए तो गरीबी को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए विभागों, प्रशासन, पंचायती राज संस्थाओं और विभिन्न साझेदार संगठनों को एक टीम के रूप में काम करना होगा।

उल्लेखनीय है कि मिशन समृद्ध गाँव में छोटे और सीमित जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए किसानों को केवल पारंपरिक अनाज उत्पादन पर निर्भर रखने के बजाय एकीकृत और विविध कृषि प्रणाली से जोड़ने की योजना है। फल एवं सब्जी उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन, पशुपालन, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को कृषि के साथ जोड़कर ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अनेक स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। इससे खेती पर मौसम और बाजार के एकमात्र प्रभाव को कम करने तथा पूरे वर्ष आय के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

कच्चे माल से मूल्यवर्धित उत्पाद तक

ग्रामीण समृद्धि का अगला महत्वपूर्ण आधार खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादन को बनाया गया है। मिशन के तहत वेयरहाउस, खाद्य प्रसंस्करण और उत्पादन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, मिशन में महिला किसानों और ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। महिला किसानों की पहचान, उन्हें कृषि संबंधी सलाह और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने ‘लखपति दीदी’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि जब ग्रामीण महिलाओं ने अपने जैसी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होते देखा, तो उनमें भी आगे बढ़ने का विश्वास और उत्साह पैदा हुआ। इस सोच के तहत सफल महिला उद्यमिता और आजीविका के मॉडल को अन्य गांवों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार, पंचायत और निजी क्षेत्र की साझेदारी

मिशन की सफलता सिर्फ सरकारी विभागों के प्रयासों पर निर्भर नहीं रखी गई है। ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, एक्सिस बैंक फाउंडेशन, एचएसबीसी, सिटीबैंक तथा अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग और सुझावों का स्वागत किया गया है। इसके साथ ही मिशन समृद्ध गाँव का अंतिम लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से इतना सक्षम बनाना है कि उन्हें रोजगार की तलाश में मजबूरी में गाँव छोड़ना न पड़े। रोजगार, कृषि विविधीकरण, महिला आजीविका, खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी सुविधाएँ और सरकारी योजनाओं का एक साथ जुड़ना इसी व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “लोगों की जिंदगी बदलना मेरी जिंदगी का मकसद है।” मध्य प्रदेश के बुधनी और खातेगांव से शुरू होने वाला यह प्रयोग इसी सोच को जमीन पर उतारने की परीक्षा होगा। यदि दोनों ब्लॉकों में योजनाओं का प्रभावी अभिसरण, परिवार-केंद्रित योजना और स्थानीय रोजगार का मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में दोहराया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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