
वॉशिंगटन, 26 अगस्त (हि.स.)। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की सुविधाओं और निगरानी उपकरणों को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नुकसान का स्तर इतना बड़ा है कि उसकी मरम्मत और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदलने में अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं।
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू
तथा
ईरान सरकार की अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलों में पश्चिम एशिया में मौजूद सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) और अन्य अमेरिकी खुफिया एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली इमारतों तथा खुफिया जानकारी जुटाने वाले उपकरणों को नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने खुफिया केंद्रों के अलावा अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया। प्रभावित क्षेत्रों में सऊदी अरब, इराक, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत शामिल हैं।
नुकसान में रडार और निगरानी प्रणालियां, फिक्स्ड इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस स्टेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और डेटा प्रोसेसिंग सेंटर शामिल बताए गए हैं। इन सुविधाओं के लिए जरूरी बिजली और कूलिंग सिस्टम को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। इससे क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखने की अमेरिकी क्षमता प्रभावित होने का दावा किया गया है।
एक आकलन में क्षेत्र में 100 से अधिक संभावित प्रभावित ठिकानों की पहचान की गई थी, जबकि रिपोर्ट में 16 अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के एक अनुमान के मुताबिक, केवल बुनियादी ढांचे की मरम्मत की लागत 5 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। इसमें क्षतिग्रस्त खुफिया उपकरण और हथियारों को बदलने की लागत शामिल नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने जुलाई के अंत में 67 अरब डॉलर की आपात फंडिंग की मांग की थी। इसमें पैट्रियट, थाड और एसएम-6 जैसी मिसाइल प्रणालियों के भंडार को फिर से भरने के लिए 18.2 अरब डॉलर शामिल थे।
इन हमलों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य और खुफिया ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने ईरान की बढ़ती मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के सामने अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताई है।
अमेरिकी अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक संघर्ष के दौरान बड़ी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिससे अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भी दबाव बढ़ा।
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। बाद में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मध्यस्थता के प्रयास हुए लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
रिपोर्ट में सामने आए नुकसान के आंकड़े पर अमेरिकी सरकार और संबंधित खुफिया एजेंसियों ने इन दावों पर काेई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी