(अपडेट) सेना को निरंतर अपग्रेड रखना जरूरी, ड्रोन-मिसाइल दौर में भी टैंक प्रासंगिक: राजनाथ सिंह

युगवार्ता    27-Aug-2026
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जबलपुर में टी-सीरीज टैंक के 472 करोड़ रुपये के ओव्हरहॉल प्रोजेक्ट के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह


- रक्षा मंत्री ने जबलपुर में टी-सीरीज टैंक के 472 करोड़ रुपये के ओव्हरहॉल प्रोजेक्ट का किया भूमि-पूजन

भोपाल, 27 अगस्त (हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध की नई तकनीक विकसित हो चुकी है। ऐसे में सेना को निरंतर अपग्रेड रखना जरूरी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जंग के तरीकों में ड्रोन, मिसाइल और साइबर तकनीक शामिल हैं, लेकिन लड़ाई में आज भी टैंक की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है। टैंक ग्राउंड ऑपरेशन में जवानों को आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

राजनाथ सिंह गुरुवार को मध्य प्रदेश के जबलपुर में टी-सीरीज टैंक के 472 करोड़ रुपये के ओव्हरहॉल प्रोजेक्ट के भूमि-पूजन के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जबलपुर में 'टी-सीरीज टैंक ओव्हरहॉल प्रोजेक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जंग में इन्हीं टैंक के सहारे हमारे जवान दुश्मन को नेस्तनाबूत कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि टैंक की भूमिका तकनीक के विकास के साथ बदल रही है। हमारे जवानों के पास ड्रोन भी हो और आधुनिक तकनीक वाले टैंक भी हों और दोनों के बीच बेहतर समन्वय हो, हम इसी रणनीति पर कार्य कर रहे हैं। जबलपुर की यह परियोजना स्थानीय लोगों को रोजगार और छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगी। जबलपुर नई टेक्नोलॉजी के साथ डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग में हब बनेगा।

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि टी-72 और टी-90 टैंक भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और सीमाओं पर आयरन वॉल की तरह खड़े हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री ने भारतीय सेना को करीब 4,400 टैंकों की आपूर्ति की है। उन्होंने एवीएनएल और इसके कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में संचालन के कारण टैंकों को समय-समय पर रिपेयर और ओवरहॉलिंग की जरूरत होती है। वर्तमान में सेना को हर साल करीब 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की आवश्यकता है, जबकि अवाडी में 150 टैंकों की क्षमता है। 80 टैंकों का यह गैप राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, जिसे जबलपुर में नई क्षमता विकसित कर दूर किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) देश के रक्षा औद्योगिक ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ है। एवीएनएल के पास टी-72 और टी-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान गुणवत्ता, उत्पादकता, नवाचार और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के नए मानक स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक, सूचना, सायबर डोमेन और सप्लाई चेन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए भारत अपने सैनिकों को महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रखना चाहता। देश में ही हथियारों का निर्माण, उनकी रिपेयर और मेंटेनेंस, आधुनिक तकनीक से अपग्रेडेशन तथा नई क्षमताओं का विकास किया जाएगा। जबलपुर की यह परियोजना इसी आत्मनिर्भरता की मजबूत कड़ी है।

रक्षा मंत्री सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025, इन्वेस्ट एमपी 3.0 और उद्योग अनुकूल नीतियों के कारण प्रदेश निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 373 हैक्टेयर भूमि पर रक्षा विनिर्माण की संभावनाएं और 16,960 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश प्रदेश की महत्वाकांक्षी सोच को दर्शाते हैं। इन प्रयासों से मध्य प्रदेश को देश का प्रमुख डिफेंस एवं एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की मजबूत नींव रखी जा रही है। उन्होंने प्रोजेक्ट को तत्परता से पूरा करने की दृढ़ इच्छा शक्ति के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव और मध्य प्रदेश सरकार की सराहना की।

आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिडेट (एवीएनएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सत्यव्रत मुखर्जी ने कहा कि भारतीय सेना को शक्तिशाली बनाए रखने में टी-सीरीज टैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जबलपुर में इस परियोजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 80 टैंकों को ओव्हरहॉल किया जा सकेगा। एवीएनएल जबलपुर सेना के लिए कई प्रकार के वाहन तैयार कर रही है।

कार्यक्रम को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक अभिलाष मिश्रा एवं अशोक रोहाणी, महापौर जगत बहादुर अन्नू, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार तथा भारतीय सेना के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीयजन उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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