


उज्जैन, 27 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन का पर्व धार्मिक परंपराओं और विशेष अनुष्ठानों के साथ मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी बांधी जाएगी। इसके लिए पुजारी परिवार की महिलाएं करीब एक सप्ताह से विशेष राखी तैयार कर रही हैं।
इस बार बाबा महाकाल के लिए करीब 2 फीट आकार की राखी बनाई जा रही है। महिलाएं पूरे सावन माह में व्रत-उपवास रखकर इस राखी का निर्माण करती हैं। इसके लिए मंदिर के पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं कई दिनों से तैयारी में जुटी हैं। 28 अगस्त को तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को यह राखी अर्पित की जाएगी। पुजारी परिवार की महिलाएं इसके लिए रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचेंगी। भस्म आरती में राखी अर्पित होने के बाद महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलेंगी। इसके बाद वे अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी।
पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, भगवान महाकाल के लिए तैयार की जा रही राखी को रेशमी कपड़े और रेशमी धागों से बनाया गया है। इसे आकर्षक रूप देने के लिए आभूषण, कांच वर्क, रुद्राक्ष और मोर पंख का इस्तेमाल किया गया है। राखी में भगवान महाकाल के प्रिय माने जाने वाले त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी स्थान दिया गया है। राखी तैयार करते समय महिलाएं ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर रही हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, रक्षाबंधन पर भगवान महाकाल को राखी अर्पित करने के बाद ही पुजारी परिवार की महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। इस परंपरा के चलते महाकाल मंदिर में रक्षाबंधन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में पिछले चार दिनों से लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। 20 से अधिक हलवाई इस काम में जुटे हैं। लड्डुओं का निर्माण मंदिर के ग्रीन रूम के पास बड़े स्तर पर किया जा रहा है। मंदिर से जुड़े पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, लड्डू शुद्ध देसी घी, बेसन, शक्कर और ड्रायफ्रूट्स से तैयार किए जा रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी एक भक्त की ओर से लड्डुओं का निर्माण कराया जा रहा है।
रक्षाबंधन के दिन तड़के भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक और पूजन किया जाएगा। इसके बाद नवीन वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार कर उन्हें राखी अर्पित की जाएगी। इसके बाद सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा और आरती होगी। भस्म आरती संपन्न होने के बाद लड्डू प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। अधिक से अधिक भक्तों तक प्रसाद पहुंचाने के लिए बड़ी मात्रा में लड्डू तैयार किए गए हैं। वितरण का सिलसिला शाम तक चलने की संभावना है।
श्रावण मास में उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए रक्षाबंधन का दिन विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन व्रत रखने वाले श्रद्धालु श्रावणी पूर्णिमा पर भगवान महाकाल को अर्पित लड्डू प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं। इसी परंपरा के तहत मंदिर में बड़ी मात्रा में लड्डुओं का महाभोग लगाया जाता है। भस्म आरती के बाद सुबह करीब 7.30 बजे होने वाली शासकीय पूजा-आरती में भी भगवान महाकाल को राखी अर्पित की जाएगी।
रक्षाबंधन से एक दिन पहले गुरुवार को भी भस्म आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। तड़के मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारी-पंडे ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल के बाद भगवान को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद मस्तक पर रजत चंद्र, चंदन और भांग के साथ त्रिपुंड लगाया गया। भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई।
भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर अपनी मनोकामना व्यक्त की और भगवान महाकाल के जयकारे लगाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे