
नई दिल्ली, 27 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह अपने एक्स हैंडल पर ऋग्वेद के एक महत्वपूर्ण श्लोक को सुभाषितम् के रूप में साझा किया। उन्होंने इसके माध्यम से परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
वह सुभाषितम् है, ''तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥'' यह श्लोक ऋग्वेद के दशम मंडल का 53वां सूक्त और उसका छठा मंत्र है। प्रधानमंत्री की पोस्ट में इसका अर्थ बताया गया है, ''मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए।''
एक्स पोस्ट के अनुसार, ''मनुष्य को बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। श्रेष्ठ जनों के सदाचार को जीवन में अपना कर निरंतर विचारशील रहना चाहिए और दिव्य गुणों से संपन्न जनों का निर्माण करना चाहिए।''
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद