तूतीकोरिन में आवणी अविट्टम अनुष्ठान की धूम

युगवार्ता    27-Aug-2026
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जनेऊ बदलने की रस्म में बड़ी संख्या में लोगों ने लिया हिस्सा


तूतीकोरिन (तमिलनाडु), 27 अगस्त (हि.स.)। दक्षिण भारत में आज वैदिक अनुष्ठान के रूप में आवणी अविट्टम का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

यह त्योहार आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। तमिल कैलेंडर के अनुसार यह 'आवणी' महीने में 'अविट्टम' (धनिष्ठा) नक्षत्र के दौरान आता है। इसलिए इसे 'आवणी अविट्टम' कहते हैं।

इस दिन पुरुष पुराने जनेऊ को उतारकर नया जनेऊ धारण करने की रस्म निभाते हैं। इस दौरान वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है और पूर्वजों तथा ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आवणी अविट्टम को वेदों के जन्म दिवस के रूप में भी माना जाता है।

कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर असुरों से वेदों को वापस प्राप्त किया और उन्हें पुनः पवित्र किया। इसलिए इस दिन को हयग्रीव जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन अतीत में की गई गलतियों के लिए प्रायश्चित करने और आगे से वेदों तथा आध्यात्मिक अभ्यासों को विधिवत जारी रखने के संकल्प का भी प्रतीक है।

आवणी अविट्टम के अवसर पर तूतीकोरिन में तेप्पाकुलम के पास स्थित भजन मंडप में तड़के ही बड़ी संख्या में पुरुषों ने जनेऊ बदलने की रस्म निभाई।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कत्ती खेल का प्रदर्शन किया और कोलाट्टम नृत्य कर उत्सव मनाया।

कुमारपालयम में आवणी अविट्टम और जनेऊ उत्सव के अवसर पर सेलम रोड, राजवीथि स्थित साउंडम्मन मंदिर, पालक्करै, बुद्धर स्ट्रीट, कत्तालपेट्टई और सदैयाम्पालयम साउंडम्मन मंदिर सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेष यज्ञ और पूजा-अर्चना की गई।

सेलम रोड स्थित साउंडम्मन मंदिर में 100 से अधिक वीरकुमारों ने कत्ती खेल का प्रदर्शन किया, जबकि छोटी बच्चियों ने कोलाट्टम नृत्य कर उत्सव मनाया। श्रद्धालुओं को प्रसाद और अन्नदान भी वितरित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

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