लंबे रेल ब्लॉक के बिना पटरियों के नीचे बनी राह, अहमदाबाद-भिवंडी में रेलवे की नई तकनीक सफल

युगवार्ता    29-Aug-2026
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पनवेल-वसई सेक्शन पर भिवंडी के पास पहला वॉटरप्रूफ सबवे


नई दिल्ली, 29 अगस्त (हि.स.)। रेलवे पटरियों के नीचे सबवे निर्माण जैसे चुनौतीपूर्ण काम को अब आधुनिक तकनीक से कम समय में पूरा किया जा रहा है। अहमदाबाद में महज आठ घंटे से कम के रात के ब्लॉक में 21 मीटर लंबे पैदल सबवे को स्थापित करने के बाद पश्चिम रेलवे ने नई मिसाल कायम की है। वहीं, भिवंडी में सात चालू रेल लाइनों के नीचे हाइड्रोलिक पुशिंग तकनीक से जलरोधक पैदल सबवे तैयार किया गया है। इन दोनों परियोजनाओं में फैक्टरी निर्मित प्री-कास्ट आरसीसी बॉक्स और अत्याधुनिक जलरोधक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, अहमदाबाद में पश्चिम रेलवे की निर्माण इकाई ने फैक्टरी में तैयार किए गए प्री-कास्ट आरसीसी बॉक्स को मौके पर स्थापित कर पैदल सबवे का निर्माण किया। 21 मीटर लंबे इस सबवे में 14 प्री-कास्ट सेगमेंट लगाए गए हैं। कट-एंड-कवर पद्धति से इसे आठ घंटे से भी कम समय के रात के ब्लॉक में स्थापित किया गया। इस तकनीक से रेलवे परिचालन को लंबे समय तक बाधित किए बिना निर्माण कार्य पूरा करने में मदद मिली।

सबवे की मजबूती और जलरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आरसीसी बॉक्स की पोस्ट-टेंशनिंग के साथ स्वेलिंग गैस्केट, डिंपल बोर्ड और एसबीएस मेम्ब्रेन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इससे संरचना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने और पानी के रिसाव की समस्या को रोकने में मदद मिलेगी।

भिवंडी में पनवेल-वसई रेलखंड पर रेलवे ने इससे भी चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा किया है। यहां सात चालू रेल लाइनों के नीचे पहली बार जलरोधक पैदल सबवे तैयार किया गया है। इसके लिए चार बड़े प्री-कास्ट आरसीसी सेगमेंट को हाइड्रोलिक पुशिंग तकनीक के जरिए पटरियों के नीचे स्थापित किया गया।

इस सबवे को भारी मालगाड़ियों के दबाव को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है और इसकी संरचना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के मानकों के अनुरूप भारी यातायात सहने में सक्षम है। जलरोधक बनाने के लिए कई स्तरों की सीलिंग और सुरक्षात्मक मेम्ब्रेन का इस्तेमाल किया गया है।

नया सबवे पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए हर मौसम में सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराएगा। इसमें ढके हुए एप्रोच, रोशनी, वेंटिलेशन और जल निकासी की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

रेल मंत्रालय ने कहा है कि प्री-कास्ट आरसीसी और हाइड्रोलिक पुशिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से कठिन निर्माण कार्यों को कम समय में पूरा करने के साथ रेल परिचालन की सुरक्षा और संरचना की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाया जा रहा है। अहमदाबाद और भिवंडी की ये परियोजनाएं रेलवे के आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बुनियादी ढांचे की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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