
रायपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सिबिल स्कोर और कमीशन का लालच देकर छात्रों और बेरोजगार युवाओं से करोड़ों की ठगी की गई है। ईएमआईभरने का झांसा देकर छात्रों और युवाओं के साथ 10 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े लोन फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस शातिर गिरोह ने 600 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है। इस प्रकरण में मुख्य आरोपित ऋषभ शर्मा को गिरफ्तार कर तीन दिन की पुलिस रिमांड के बाद आज न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
इससे पहले मुख्य आरोपित अनिरुद्ध सिंह और दीपेश जोशी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इस मामले का मुख्य आरोपित ऋषभ शर्मा जुलाई 2026 के आखिरी हफ्ते में पुलिस की बढ़ती दबिश के बाद न्यायालय (कोर्ट) में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरोह ने ई एमआई हम भरेंगे कहकर लोगों के दस्तावेज लिए और उनके नाम पर आईफोन, टीवी, एसी और पर्सनल लोन लेकर पैसे हड़प लिए।
सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने आज बताया कि दुर्ग, भिलाई, रायपुर, बिलासपुर और बालोद के 600 से ज्यादा लोग इसके शिकार हुए हैं। धोखाधड़ी की रकम 10 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। जांच में आरोपित ऋषभ शर्मा के चार से पांच बैंक खातों में लगभग 1.84 करोड़ रुपये के लेन-देन का भी पता चला है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है । आरोपित के खुलासे और बयानों के आधार पर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक पासबुक, चेक बुक और मोबाइल फोन खरीद के बड़े पैमाने पर इनवॉइस (बिल) जब्त किए हैं। इस नेटवर्क में पैसों के लेन-देन (फंड फ्लो) और पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने 7 से 8 बैंकों को नोटिस जारी किया है
पुलिस जांच में यह सामने आया कि आरोपितों ने शुरुआती तीन माह तक ईएमआई की किस्तें जमा कर पीड़ितों का विश्वास बनाए रखा। अप्रैल 2026 से किस्तों का भुगतान बंद कर दिया गया। इसके बाद जब रिकवरी एजेंसियां पीड़ितों के घर पहुंचीं, तब उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी मिली।
पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा शंकराचार्य कॉलेज के बीकॉम तृतीय वर्ष के छात्र हिमांशु देवांगन की शिकायत के बाद हुआ। आरोपितों ने छात्रों और युवाओं को यह कहकर अपने झांसे में लिया कि उनके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान एवं पर्सनल लोन लेने से सिबिल स्कोर बेहतर होगा। साथ ही प्रत्येक फाइनेंस पर दो से तीन हजार रुपये कमीशन देने और सभी ईएमआई स्वयं जमा करने का भरोसा भी दिया गया।
आरोपितों के झांसे में आकर पीड़ितों ने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक संबंधी दस्तावेज उन्हें सौंप दिए। इसके बाद आरोपितों ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आईफोन, एलईडी टीवी, एयर कंडीशनर सहित अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए। इसके अलावा बजाज फाइनेंस से लगभग 92 हजार रुपये का पर्सनल लोन स्वीकृत कराकर राशि अपने क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त कर ली।
पदमनाभपुर थाना पुलिस के अनुसार, अब तक 31 छात्रों से 34.13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया गया है।
--------------
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा