
- ओरछा की पावन धरती पर भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक
- शिवराज बोले- रामराज्य की स्थापना पार्टी का लक्ष्य; सिंधिया ने जताया सार्थक परिणामों का विश्वास
ओरछा,भोपाल, 30 अगस्त (हि.स.)। मप्र के बुंदेलखंड की धरती पर बसी ओरछा नगरी इन दिनों एक बार फिर राष्ट्रीय और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। यह वही क्षेत्र है जहां भगवान श्रीराम आराध्य देव के रूप में विराजमान होने के साथ ही राजा के रूप में विराजमान हैं। यहां सदियों से श्रीराम को ‘रामराजा सरकार’ के रूप में राजकीय सम्मान देने की परंपरा चली आ रही है। इसी विशिष्ट आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परिवेश में भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि बैठक में प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी जुटे हैं। ऐसे में संगठनात्मक मंथन के लिए चुना गया ओरछा का स्थान अपने आप में राजनीतिक संदेश भी दे रहा है, सुशासन, लोककल्याण और ‘रामराज्य’ के आदर्शों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का संकल्प। रविवार को कार्यसमिति की बैठक के दौरान पार्टी नेताओं के वक्तव्यों में भी यही भाव स्पष्ट दिखाई दिया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रामराजा सरकार के दरबार में पहुंचने को अपना सौभाग्य बताया, वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विश्वास जताया कि ओरछा की पावन धरती पर होने वाले इस मंथन से संगठन और प्रदेश के लिए सकारात्मक एवं सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
पार्टी नेताओं ने बैठक के दौरान रामराज्य की अवधारणा को सुशासन, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए अपने संकल्प को दोहराया। भाजपा के लिए रामराज्य का अर्थ ऐसी शासन व्यवस्था से जोड़ी जा रही है जिसमें अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण पहुंचे, समाज में न्याय और समान अवसर सुनिश्चित हों तथा देश आत्मनिर्भर और सशक्त बने। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान,शिव प्रकाश ,ज्योतिरादित्य सिंधिया महेंद्र सिंह, तरुण चुग ,लाल सिंह आर्य ,गजेंद्र पटेल ,कविता पाटीदार, वंशीलाल गुर्जर,बीड़ी शर्मा, आशीष ऊषा अग्रवाल, सावित्री ठाकुर ,डीडी उइके सहित कई केंद्रीय मंत्री, विधायक ,जिला अध्यक्ष प्रदेश कार्यसमिति में शामिल सदस्य मौजूद रहे।
शिवराज बोले- रामराज्य की स्थापना भाजपा का लक्ष्य
पत्रकारों से चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भगवान रामराजा सरकार के चरणों में आने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि ओरछा में भगवान श्रीराम केवल भगवान नहीं हैं, बल्कि यहां के राजा भी हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रामराज्य की स्थापना भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य है। उनके इस बयान को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के व्यापक वैचारिक संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां पार्टी संगठन आगामी राजनीतिक और सामाजिक दिशा पर मंथन कर रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैभवशाली, गौरवशाली, संपन्न, समृद्ध, शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है और देश को विकसित बनाने के लिए सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सुशासन और विकास पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भी रामराज्य की स्थापना के लक्ष्य के अनुरूप निरंतर प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, रामराज्य की अवधारणा को आधुनिक शासन व्यवस्था में जनकल्याण, विकास, सुशासन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हित से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
सिंधिया बोले- मंथन से निकलेंगे सार्थक परिणाम
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ओरछा की पावन धरती पर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने को अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी में आयोजित बैठक से निश्चित रूप से सकारात्मक और सार्थक परिणाम सामने आएंगे।
सिंधिया के बयान से संकेत मिलता है कि कार्यसमिति को पार्टी की आगामी रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में सरकार की उपलब्धियों, संगठन की सक्रियता, आगामी राजनीतिक चुनौतियों और जनसंपर्क से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श की संभावना है।
संगठन और सरकार के लिए नई ऊर्जा की उम्मीद
शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि ओरछा में होने वाली यह बैठक सरकार और संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। भाजपा के लिए प्रदेश कार्यसमिति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ऐसे मंच पर पार्टी अपने संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा करने के साथ आगामी प्राथमिकताओं को लेकर दिशा तय करती है।
रामराजा सरकार के दरबार में शीश नवाने के बाद शुरू हुआ यह राजनीतिक मंथन इस अर्थ में भी विशेष है कि बैठक का स्थान स्वयं एक विचार और परंपरा का प्रतीक है। भगवान राम को राजा मानने वाली ओरछा की धरती से भाजपा नेताओं ने रामराज्य, सुशासन, जनकल्याण और विकसित भारत के संकल्प को सामने रखा है।
अब सबकी निगाहें इस दो दिवसीय मंथन से निकलने वाले फैसलों और राजनीतिक-संगठनात्मक संदेश पर टिकी हैं। यदि ओरछा की इस बैठक से लिए गए संकल्प जमीनी स्तर पर संगठन और शासन की प्राथमिकताओं में दिखाई देते हैं, तो रामराजा सरकार की नगरी में हुआ यह महामंथन भाजपा के लिए आने वाले समय की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा इतना तय है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी