
- केंद्र से विदेशी शरणार्थियों को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकने का आग्रह
नई दिल्ली, 04 अगस्त (हि.स.)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बांग्लादेश की विवादास्पद लेखिका तस्लीमा नसरीन की कोलकाता में की गई हालिया टिप्पणियों को भड़काऊ, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से निराधार बताते हुए कड़ी निंदा की है। इसके साथ इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने वाला बताते हुए कहा कि यह किसी विदेशी नागरिक के जरिए देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का गैर जिम्मेदाराना प्रयास है।
दरअसल, तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और मदरसों के संबंध में बयान दिया था, जिसको लेकर मुसलमानों में नाराजगी है। इस पर
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में कहा कि इस तरह के निराधार आरोप न केवल लाखों भारतीय मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि देश की सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने का एक सुनियोजित प्रयास भी प्रतीत होता है।
डॉ. इलियास ने कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि खुद शरणार्थी के रूप में भारत में रह रही तस्लीमा नसरीन देश के धार्मिक, संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर भड़काऊ टिप्पणी कर रही है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में किसी को भी नफरत फैलाने, धार्मिक संस्थाओं को बदनाम करने या देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि ऐसे व्यक्ति कानून के दायरे में रहें तथा ऐसे भड़काऊ बयानों की पुनरावृत्ति को रोका जाए। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी गैर जिम्मेदाराना और भारत की संतुलित विदेश नीति के खिलाफ है। इस तरह के बयानों से दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है और भारत सरकार को इस पहलू पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
बोर्ड प्रवक्ता
डॉ. इलियास ने आगे कहा कि इस्लामी मदरसों को बदनाम करने का अभियान कोई नई बात नहीं है। पिछले कई दशकों में इसी तरह के आरोप बार-बार लगाए गए हैं, फिर भी न तो इन आरोपों को लगाने वालों ने कभी कोई विश्वसनीय सबूत पेश किया है, न ही देश में किसी जांच या सुरक्षा एजेंसी ने ऐसे दावों की पुष्टि की है। इसके बावजूद मदरसों की निंदा करना एक संगठित राजनीतिक और वैचारिक अभियान का हिस्सा बन गया है।
उन्होंने बताया कि वास्तविकता यह है कि भारत भर में हजारों मदरसे सरकारी खजाने पर कोई वित्तीय बोझ डाले बिना लाखों बच्चों को शिक्षा प्रदान करते हैं। उनके हजारों स्नातक अग्रणी विश्वविद्यालयों से उच्च योग्यता प्राप्त करते हैं और न्यायपालिका, शिक्षा, पत्रकारिता, सिविल सेवाओं, सामाजिक कार्य और कई अन्य क्षेत्रों में विशिष्टता के साथ राष्ट्र की सेवा करते हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भारत सरकार से इन भड़काऊ टिप्पणियों का गंभीरता से संज्ञान लेने, विदेशी शरणार्थियों को भारत के आंतरिक और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि देश के संवैधानिक और सामाजिक ताने-बाने को किसी भी विदेशी व्यक्ति की घृणा से प्रेरित राजनीति का शिकार न बनने दिया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार/मोहम्मद ओवैस
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद