

उज्जैन, 04 अगस्त (हि.स.)। सावन के महीने में मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद नगर में रिमझिम बारिश के बीच समर्पण कांवड़ यात्रा निकली, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान अवंतिका नगरी बम भोले क जयकारों से गूंज उठी।
समर्पण कांवड़ यात्रा के संयोजक एवं समाजसेवी नारायण यादव ने बताया कि भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में हर साल की तरह इस बार भी सुबह 11 बजे इंदौर रोड स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर, त्रिवेणी घाट से कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। बैंड-बाजों के साथ श्रद्धालुओं ने कांवड़ का पूजन किया और महाकाल मंदिर के लिए रवाना हुए। यात्रा में बड़ी संख्या में भोले के भक्त शामिल हुए। रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और महिला-पुरुषों के साथ बच्चे भी बम भोले के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए।
यात्रा के प्रस्थान से पूर्व शनि मंदिर परिसर में संतों एवं वरिष्ठजनों की गरिमामयी उपस्थिति में कावड़ का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज, संत नंदन महाराज और महंत विनीत गिरी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री नवग्रह शनि मंदिर, त्रिवेणी घाट से मोक्षदायिनी मां शिप्रा का पवित्र जल लेकर हजारों महिला एवं पुरुष कांवड़ यात्री भगवान श्री महाकालेश्वर का जलाभिषेक करने के लिए रवाना हुए। इस दौरान पूरा माहौल शिवमय दिखाई दिया।
त्रिवेणी घाट से पूजन-दर्शन के बाद कावड़ यात्रा श्री नवग्रह शनि मंदिर (त्रिवेणी घाट, इंदौर रोड), नानाखेड़ा चौराहा, मुनीम नगर दो तालाब, संतराम सिंधी कॉलोनी चौराहा, शास्त्री नगर, नीलगंगा चौराहा और हरि फाटक ओवरब्रिज से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान शहर में जगह-जगह मंच बनाकर श्रद्धालुओं और कावड़ियों का भव्य स्वागत किया गया।
इससे पहले मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती हुई, जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि श्रावण कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर अलसुबह 3 बजे वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से जलाभिषेक किया गया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर 'हरि ॐ' का जल अर्पित किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य स्वरूप में श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई।
पूजन के बाद भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड से अलंकृत किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। इसके बाद बाबा को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शनों का लाभ लिया। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर